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हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकारी स्कूलों से घट रहा मोह


हिमाचल के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकारी स्कूलों के प्रति मोह कम हो रहा है। साल 2018 के मुकाबले 2020 में छह फीसदी लड़कों और दो फीसदी लड़कियों ने सरकारी स्कूल छोड़ निजी स्कूलों में दाखिले लिए हैं। भारी-भरकम फीस के बावजूद अभिभावक निजी स्कूलों को तवज्जो दे रहे हैं। एनुअल स्टेट्स ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2020 के प्रथम चक्र में इसका खुलासा हुआ है। 

बीते दिनों नई दिल्ली में यह रिपोर्ट जारी हुई है।प्रदेश के 12 जिलों के 357 गांवों में 1669 घरों में फोन से हुए सर्वे पर रिपोर्ट तैयार की है। इसमें 1697 विद्यार्थियों से संपर्क किया गया। रिपोर्ट में बताया कि साल 2018 में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र 58 फीसदी और छात्राएं 64 फीसदी थे, निजी स्कूलों में इनकी संख्या क्रमश: 41 और 35 फीसदी थी। साल 2020 में छात्रों की सरकारी स्कूलों में संख्या 52 फीसदी और छात्राओं की संख्या 62 फीसदी रह गई है। निजी स्कूलों में इस साल छात्रों की संख्या 47 फीसदी और छात्राओं की संख्या 37 फीसदी पहुंच गई। 

निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चाें के अभिभावक अधिक शिक्षित निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अधिक शिक्षित हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों के बच्चाें की आठ फीसदी माताएं और चार फीसदी पिता स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके हैं, जबकि निजी स्कूलों के लिए माताओं का यह आंकड़ा एक फीसदी और पिता का आंकड़ा 0.6 फीसदी है। सरकारी स्कूल वाली 27 फीसदी माताएं और 33 फीसदी पिता ग्यारहवीं कक्षा से अधिक पास है। निजी स्कूलों में 66 फीसदी माताएं और 64 फीसदी पिता ग्यारहवीं कक्षा से अधिक पढ़े हैं।

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