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पाकिस्तान के खिलाफ मैच से पहले रात को सो नहीं पाते थे सचिन तेंदुलकर


सचिन तेंदुलकर भले ही शतकों का शतक लगाने वाले दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ मैच से पहले उनकी भी रातों की नींद उड़ जाती थी। यह बात उन्होंने खुद स्वीकार की थी। आज तक के एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि 2003 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच से पहले भी वह रात में ठीक से नहीं सो पाए थे। इसका असर अगले दिन उनके प्रदर्शन पर भी पड़ा था।

सचिन से एंकर ने पूछा था, यह सच है कि आपको नींद नहीं आई कई मैचों से पहले? पाकिस्तान भारत के वर्ल्ड कप के मैच के दौरान भी? इस पर सचिन ने बताया, ‘बहुत बार हुआ ऐसे। पहले तो करियर में मुझे हर मैच से पहले नींद नहीं आती थी। मैं सोचता रहता था कि मुझे कैसी बैटिंग करनी है दूसरे दिन? क्या प्लानिंग करनी है? किसको कैसा खेलना है? कब बॉल मारना है, कब छोड़ना है? कब डिफेंड करना है? यह सारी चीजें दिमाग में चलती थीं। खासकर मुझे अब भी याद है कि 2003 वर्ल्ड कप में जब हम पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने वाले थे, तब उसके पहले भी मुझे थोड़ी तकलीफ हुई थी रात को सोने में।’

सचिन ने बताया, ‘मैं हर बार नींद में कभी इस तरफ करवट बदलता, तो मैं सोचता था कि अगर मुझे वसीम ने ऐसा डाला बॉल तो मैं छोड़ूंगा या खेलूंगा। दूसरी तरफ करवट बदलता तो वकार यूनिस, शोएब अख्तर, शाहिद अफरीदी सब दिखते थे। मुझे लगता है कि दरअसल, मेरा शरीर तैयार हो रहा था, एक बड़े मैच के लिए। मुझे एक स्टेज पर महसूस हुआ कि जैसा चाहिए था उतना रेस्ट (आराम) मिला नहीं था, क्योंकि उस मैच में मुझे बॉडी का अलग रिस्पॉन्स दिखा था।’

सचिन तेंदुलकर ने भारत-पाकिस्तान वर्ल्ड कप मुकाबलों में से 2003 के उस मैच को ही अपना सबसे यादगार मुकाबला भी बताया। उन्होंने कहा, ‘मैं 2003 वाले मैच को ही सबसे यादगार मुकाबला कहूंगा, क्योंकि उस मैच में जब हम होटल से निकले और ग्राउंड के पास पहुंचने तक, ग्राउंड से करीबन एक किलोमीटर पहले से ही भीड़ इकट्ठा थी। एक तरफ भारत के झंडे लहरा रहे थे। दूसरी तरफ पाकिस्तानी के फैंस। बहुत से दोस्त भी भारत से वहां मैच देखने पहुंचे थे।’

सचिन ने बताया, ‘कई अलग-अलग देशों से भी हमारे दोस्त आए हुए थे। इन सब चीजों ने वातावरण कुछ अलग बना दिया था। आप जब ग्राउंड के अंदर खड़े होते हैं, मैच से पहले जब एक दूसरे से हाथ मिलाते हो और जब राष्ट्रगान बजता है तो वह क्षण कुछ अलग ही होता है। वह आपको बताना मुश्किल है। रोंगटे खड़े होते हैं। आप खुद पर गर्व महसूस करते हैं कि मैं इंडिया को रिप्रेजेंट कर रहा हूं। और उसका नतीजा भी उतना ही अच्छा होना बराबर से महत्वपूर्ण है।’

बता दें कि दक्षिण अफ्रीका के सेंचुरियन में खेले गए उस मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी थी। उसने 50 ओवर में 7 विकेट पर 273 रन का स्कोर खड़ा किया था। उस जमाने में 270 या उससे ज्यादा का स्कोर मैच विनिंग माना जाता था। हालांकि, सचिन तेंदुलकर (75 गेंद में 98 रन) और युवराज सिंह (53 गेंद में 50 रन) की पारियों के दम पर भारत उस असंभव जीत को अपने नाम करने में सफल रहा था।

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