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ढाका में बजता है मां ढाकेश्वरी का डंका, तोड़ा था पाकिस्तान का गुरूर


भारत भूमि के कण-कण में मां भगवती का निवास है। भारत के विभिन्न गांव-शहरों में मां के अनेक मंदिर हैं। पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में नवरात्र के दौरान की जाने वाली दुर्गापूजा तो विश्व-प्रसिद्ध है।

किसी समय मां भगवती का एक प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र का बड़ा तीर्थ था। आज यह बांग्लादेश में स्थित है। दक्षिणेश्वर के काली मंदिर की तरह ही यह भी एक सिद्ध व चमत्कारी शक्तिपीठ है। इस मंदिर में मां ढाकेश्वरी विराजमान हैं।

मान्यता है कि मां ढाकेश्वरी के नाम पर ही बांग्लादेश की राजधानी का नाम ढाका है। 1947 से पहले यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते थे। तब यह अखंड भारत का एक महत्वपूर्ण भाग था।

विभाजन के बाद यह पाकिस्तान में चला गया था। 1971 में बांग्लादेश निर्माण के बाद यह इस इलाके में रहने वाले हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है।

कब हुआ मंदिर का निर्माण
इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में सेन राजवंश के राजा बल्लाल सेन ने करवाया था। माना जाता है कि यहां देवी सती के आभूषण गिरे थे।

अलग राष्ट्र बनने के बाद इस मंदिर को भी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन माता के प्रताप से यह आज भी बरकरार है और लाखों लोगों की आस्था इससे जुड़ी है।

पाकिस्तान को दी थी शिकस्त
1971 की लड़ाई में पाकिस्तान की सेना ने इस मंदिर को नुकसान पहुंचाया था। सेना ने इस पवित्र स्थान को शस्त्रागार बना लिया और यहां की परंपराओं का पालन नहीं किया।

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता के प्रकोप से पाकिस्तान को युद्ध में शिकस्त मिली। आज भी मां ढाकेश्वरी को नमन करने श्रद्धालु आते हैं और मां भी उनकी मनोकामना पूर्ण करती हैं।

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