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स्त्री हो या पुरुष, इन कार्यों में कभी नहीं करनी चाहिए शर्म


एक श्लोक में ऐसे तीन कार्यों के बारे में बताया गया है, जिनमें शर्म करना अच्छी बात नहीं है बल्कि बेशर्म होने पर ही सफलता मिलती है। ये हैं वे तीन कार्य -

भारत की सभ्यता-संस्कृति में स्त्री या फिर पुरुष दोनों के लिए लाज-शर्म उनके व्यवहार का गहना माने गए हैं, लेकिन कुछ काम ऐसे भी हैं जिन्हें करने के लिए बेशर्म होना अनिर्वाय माना गया है, अन्यथा स्वयं का नुकसान तय है।

ऐसे में ही महान आचार्य चाणक्य की नीतियों का पालन करने से कोई भी इंसान कभी भी गलत रास्ते पर नहीं जा सकता है, उसकी कभी हानि नहीं होती।

जीवन में किसी भी तरह की परेशानी व नुकसान से बचना चाहते हैं तो उनकी नीतियों को जीवन में अवश्य धारण करना चाहिए। उनके एक श्लोक में ऐसे तीन कार्यों के बारे में बताया गया है, जिनमें शर्म करना अच्छी बात नहीं है बल्कि बेशर्म होने पर ही सफलता मिलती है। 

ये हैं वे तीन कार्य - पैसों से संबंधित कार्यों में शर्म करने से वित्तीय घाटा सहना पड़ता है। उधार दिए रुपयों को वापस मांगने पर हम शर्म अनुभव करते हैं। जिसके कारण हमें उधार दिया धन वापस नहीं मिलता, इससे हमारा ही नुकसान होता है। 

जो शिष्य गुरु से प्रश्न पूछते समय शर्म करता है उसे ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो पाती। उत्तम शिष्य शिक्षा प्राप्ति के समय शर्म नहीं करता। इसलिए गुरु से ज्ञान लेते समय कभी भी शर्म न करें।

भोजन करते समय शर्म करने वाला व्यक्ति भूखा रहता है। संभवत: कई लोग अपने रिश्तेदारों के घर में शर्म के कारण भर पेट भोजन नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें ही भूखे रहना पड़ता है।

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