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क्या है Pfizer कोरोना वायरस वैक्सीन, भारत में कब तक आएगी?


कोरोना संकट से जूझ रही पूरी दुनिया को सोमवार को बड़ी खुशखबरी मिली है. अमेरिका की फार्मा कंपनी फाइजर और जर्मन बायाटेक फर्म बायोनटेक मिलकर कोरोना वैक्सीन बनाई है. कंपनी ने सोमवार को इस वैक्सीन का ऐलान किया है. कंपनी ने दावा किया है कि इस वैक्सीन से 90 फीसदी तक कोरोना वायरस को रोका जा सकता है. इस वैक्सीन के विश्लेषण में अमेरिका और 5 अन्य देशों में करीब 44,000 लोगों को इसमें शामिल किया गया था. आइए जानते हैं इस वैक्सीन के बारे में 5 बड़ी बातें-

वैक्सीन के बारे में क्या कहता है कंपनी का डाटा?
फाइजर ने कहा कि टेस्टिंग में कोविड-19 के 94 पुष्टि मामलों का मूल्यांकन किया. कंपनी ने टीकाकरण वाले व्यक्तियों और प्लेसीबो प्राप्त करने वालों मरीजों को दो भागों में बांटा था. फाइजर ने कहा कि दूसरी खुराक के ठीक 7 दिन बाद वैक्सीन कोरोनावायरस को रोकने में 90 फीसदी तक कारगार साबित होगी लेकिन, फाइजर ने अपने विश्लेषण में इस बात का खुलासा नहीं किया कि कितने पुष्ट मामलों को टीका लगाया है और कितने को प्लेसबो दिया गया.

28 दिन बाद खतरे से बाहर होगा मरीज

फाइजर के मुताबिक, वैक्सीन लगाने के 28 दिन के बाद रोगी खतरे से बाहर होगा. बता दें कि स्वतंत्र डाटा निगरानी समिति की ओर से 8 नंवबर को आखिरी ट्रायल किया गया था, लेकिन समिति ने किसी भी गंभीर चिंता के बारे में नहीं बताया. ऐसे में डेटा पर दुनिया भर के नियामक अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी.

कब टीका माना जाएगा प्रभावी?
फाइजर के प्रोटोकोल के मुताबिक, 32 परीक्षण प्रतिभागियों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद पहला विश्लेषण हुआ था. इन 32 प्रतिभागियों को दो भागों टीकाकरण और प्लेसीबो प्राप्त करने वालों के बीच बांटा गया था. यदि टीके समूह में छह से कम प्रतिभागियों में टेस्ट पॉजिटिव आता है तो टीका प्रभावी माना जाता है.

पॉजिटिव रहा कंपनी का रिजल्ट
आपको बता दें अंतिम विश्लेषण के लिए 164 मामलों की जांच की गई थी. इसे यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा सफल माना जाने के लिए 50 प्रतिशत प्रभावकारिता की आवश्यकता महसूस की गई. फाइजर के मामले में, यूएसएफडीए के साथ चर्चा के बाद कंपनियों ने न्यूनतम 62 मामलों को पहला अंतरिम विश्लेषण करने के लिए चुना है, जिसके बाद यह गिनती 94 तक पहुंच गई. बता दें फाइजर की पहली अंतरिम समीक्षा एक बहुत बड़े नमूने पर की गई, जिसका परिणाम सकारात्मक रहा.

वैक्सीन को लेकर आगे क्या प्लान है कंपनी का?
फाइजर ने कहा कि इस महीने के अंत में टीके के आपातकालीन प्राधिकरण के लिए यूएस एफडीए से पूछने की योजना है. इसके बाद उन्होंने दो महीने का सुरक्षा डेटा एकत्र किया है. इस बीच, नैदानिक परीक्षण आगे के आंकड़ों को इकट्ठा करने के लिए 164 पुष्ट मामलों में अंतिम विश्लेषण जारी रहेगा और वैक्सीन उम्मीदवारों के प्रदर्शन को विश्लेषित करेगा. फाइजर ने कहा कि आखिरी ट्रायल में आंकड़ों में बदलाव आ सकता है.

क्या भारत में आएगी फाइजर वैक्सीन?
वर्तमान अनुमानों के आधार पर फाइजर ने कहा कि कंपनी के 2020 में विश्व स्तर पर 50 मिलियन और 2021 तक 1.3 बिलियन वैक्सीन का उत्पादन करने की उम्मीद है. वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि साल के अंत तक, फाइजर 15 से 20 मिलियन लोगों को टीकाकरण करने के लिए पर्याप्त वैक्सीन का निर्माण कर लेगा, लेकिन फाइजर ने अभी तक भारत में इस वैक्सीन को उपलब्ध कराने की अपनी योजनाओं की घोषणा नहीं की है. बता दें कि इस वैक्सीन की स्टोरेज के लिए ठंडी जगह का चुनाव करना होगा.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट का मानना है कि फाइजर और बायोएनटेक के टीके के परिणाम का इंतजार है. वहीं, विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि लोग अभी सावधानीपूर्वक रहे क्योंकि विश्लेषण का यह अभी शुरुआती डेटा है. वहीं, वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंसेज विभाग के प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कांग ने कहा कि 'यह अच्छा है लेकिन अधिक जानकारी उपलब्ध होने पर ही हम इस पर ठीक से टिप्पणी कर सकते है.' बता दें कि फाइजर और बायोएनटेक वैज्ञानिक सहकर्मी-समीक्षा प्रकाशन के लिए पूर्ण चरण-3 परीक्षण से डेटा जमा करने की योजना है.

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