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बहुत वादे निभाने थे.. अधूरा रह गया सबकुछ, मां-पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

बहुत वादे निभाने थे.. अधूरा रह गया सबकुछ, मां-पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

शहीद अनिल तोमर के घर में सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कभी मां की ममता जवाब दे जाती है तो कभी पत्नी को उनके वादे याद आ जाते हैं। रोते-रोते आंखें लाल हो गईं हैं लेकिन आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। 

मां कुसुमवती बार-बार बच्चों और बहू को देखकर रोने लगतीं हैं तो पिता भोपाल तोमर निशब्द हैं। परिवार इस पहाड़ जैसे गम को कैसे सहन करे, परिचित रिश्तेदार भी ये ढाढ़स नहीं बंधा पा रहे हैं। पूरे गांव में मातम पसरा है। हर कोई बस यही कह रहा है कि अनिल तुमको तो घर वालों को किए बहुत वादे निभाने थे..सबकों बीच राह में छोड़कर चले गए।

किसान भोपाल सिंह तोमर के घर जन्मे अनिल तोमर बचपन से ही होनहार थे। मऊखास इंटर कॉलेज से इंटर करने के बाद सेना की तैयारी शुरू कर दी। साल 2000 में उनका सेना में चयन हो गया। पिता चुप हैं, वे बस इतना ही बोल रहे हैं कि बहादुर बेटे को अभी तो घर में सबके वादे पूरे करने थे। सबको छोड़कर चला गया। मां कुसुम और पत्नी पूनम का रो-रोकर बुरा हाल है।

आठ साल का बेटा लक्ष्य अभी इतना नहीं जानता, लेकिन 14 साल की तान्या को पता है कि उसने अपने पिता को खो दिया है। घर जब भी आते तो परिजनों से यही कहते कि बच्चों को अच्छी पढ़ाई कराऊंगा ताकि ये दोनों अफसर बन सकें। बेटी तान्या नौवीं कक्षा में और बेटा लक्ष्य चौथी कक्षा में है।

कुछ समय पहले हुई थी प्रोन्नति अनिल फरवरी में रिटायरमेंट लेने का मन बना चुके थे लेकिन उनका हवलदार के पद पर प्रमोशन हो गया। जिसके बाद चार साल के लिए उन्होंने फिर सेना में ही रहने का मन बना लिया। ग्रामीणों के अनुसार अनिल की दो माह पूर्व सेवानिवृत्ति होनी थी। उसके कागजात तैयार किए जाने के दौरान पत्नी का नाम गलत दर्ज हो गया था। इसके चलते सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसी दौरान अनिल की प्रोन्नति हवलदार पद पर हो गई। इसके साथ ही उसका तीन साल का सेवा विस्तार हो गया।

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