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कारगिल विजय दिवस: विक्रमसिंह देश के लिए हो गए न्यौछावर, पत्नी को अब भी वादा पूरा होने का इंतजार


ऑपरेशन विजय के दौरान 28 जून 1999 को कृष्णा पहाड़ी पर पाकिस्तानी सेना से लोहा लेते हुए भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले ढाढा ग्राम के शहीद विक्रमसिंह अपनी टुकड़ी के सैनिकों के साथ दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। शहीद की वीरांगना कृष्णा कंवर को सालों बाद भी सरकार सेना अस्पताल में उपचार की सुविधा नहीं दे पाई, जिस कारण उपचार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

सरकार से कारगिल शहीदों के परिजनों को कई सुुविधाएं देने का वादा किया था जो आज भी महज एक छलावा ही बना हुआ है। कृष्णा कंवर के पुष्पेन्द्रसिंह, आजादसिंह व नीरजसिंह तीन लड़के व एक लड़की है। नीरज विक्रमसिंह की शहादत के समय महज एक माह का था। पुष्पेन्द्र व आजाद भी छोटे ही थे। ये अपने पिता की शहादत के बारे में अक्सर पूछते रहते हैं।

वीरांगना ने बताया कि वह अपनी चारों संतानों को पालने के लिए जयपुर चली गई थी। केन्द्र सरकार ने इस परिवार को जयपुर ट्रांसपोर्ट नगर में एक गैस एजेंसी शहीद पैकेज में दी है। सरकार ने हमें मकान आदी कुछ भी नहीं दिया। सेना अस्पताल की सुविधा नहीं मिलने से परिवारजन निजी स्तर पर उपचार करवाते हैं। कई बार रक्षा मंत्रालय व सैनिक कल्याण बोर्ड में चक्कर लगाने के बाद भी चिकित्सा के कागजात नहीं बने।

वीरांगना का दुख-
वीरांगना का इस बात का बड़ा दुख है कि उन्हे स्थानीय सहयोग नहीं मिला, जिस कारण उन्होंने अपने स्तर पर शहीद का स्मारक बनवाया। यह स्मारक ढाढा चौक पर बनना था, जिसको ग्राम के अंदर बनाया गया। वीरांगना ने बताया कि ड्यूटी पर जाने से पूर्व अपने लिए घर बनवाने का काम चला कर तीन माह पूर्व गए थे। नए घर में वो नहीं आए उनका पार्थिव शरीर ही आया था।

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