Breaking News

कांगड़ा: राम सिंह ठाकुर के संगीत ने जगाया था अाजादी का अलख


खनियारा गांव से एक ऐसी शख्सियत जिनके शब्द युवाओं में अाजादी की लड़ाई में जोश भरते थे। उनके संगीत से देश प्रेम का जज्बा अौर बढ़ जाता अौर युवा अाजादी की लड़ाई में भूखे प्यासे व कई परेशानियां झेलते पर निडरता व अात्म विश्वास के साथ तय लक्ष्य स्वतंत्रता को पाने के लिए जुटे रहे। खनियारा गांव से गोरखा समुदाय से संबंधित एेसी शख्सियत जिसने देश के राष्ट्रगान के लिए धुन तैयार की है। नेता सुभाष चंद्र बोष के सामने एेसी जोश भरी प्रस्तुति दी कि नेता सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें अपना वायलन तोहफे में दिया अौर उन्हें देश के कौमी तराने गाने के लिए प्रेरित किया। जी हां यहां पर बात हो रही है। जन गन मन धुन के रचियता कैप्टन राम सिंह ठाकुर की जो अाजादी के बाद अाल इंडिया रेडियो की शान रहे।

1914 में खनियारा पैदा हुए थे कैप्टन राम सिंह ठाकुर

कैप्टन राम सिंह ठाकुर का जन्म 15 अगस्त 1914 को धर्मशाला के गांव खनियारा में एक फौजी परिवार के यहां हुअा था। उनके पिता का नाम हवलदार दिलीप सिहं ठाकुर थे। उन्होंने मिडल तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1928 में 14 वर्ष की अायु में सेकेंड फस्ट गोरखा राइफल में बतौर रिक्रूट ब्वाय बैंड में भर्ती हुए। कैप्टन राम सिंह ठाकुर को बचपनकाल से ही संगीत के प्रित अधिक लगाव था। वैसे तो प्रारंभ में उन्हें अपने नाना नत्थू चंद ठाकुर से शास्त्रीय संगीत सीखने की प्रेरणा मिली थी। लेकिन बाद में उन्होंने अंग्रेज एनएस होस्टन अौर डेविडसे ब्रासबैंड, स्ट्रिंगबैंड अौर डांसबैंड का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अंग्रेज कप्तान डेनिस लिली रोज से उन्हें वायलन बजाने की प्रेरणा मिली थी। वायलेन सीखने के लिए उन्होंने अपने वेतन में से बचत करके एक वायलन खरीदा। इस समय उन्हें एक रुपये अाठ अाना यानि डेढ़ रुपये मासिक वेतन मिलता था।

जानिए किसके साथ हुअा था विवाह कैप्टन राम सिंह ठाकुर का वर्ष 1939 में सूबेदार मेजर शमशेर सिंह की सुपुत्री प्रेम कली ने उनका विवाह संपन्न हुअा। प्रेम कली ने उन्हें तीन पुत्रों प्रकाश, रमेश अौर उदय शंकर की प्राप्ति हुई।

कैप्टन राम सिंह ठाकुर को जापानी सेना ने बताया बंदी

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 23 अगस्त 1941 को कैप्टन राम सिंह ठाकुर व उनके साथियों को अंग्रेजी सेना के अधीन अग्रिम मोर्चा में दुश्मन सेना (यानी जापानी सैनिकों) के विरुद्ध मोर्चा लेने के लिए उन्हें बंबई से भलाया- सिंगापुर जाने का अादेश हुअा। दिसंबर 1941 को जापानी सेनाओं ने भलाया-सिंगापुर अौर फिर थाइलैंड (ब्रह्मा) में जोरदार हमला बोल दिया। फरवरी में युद्ध सामग्री, गोला बारूद अौर खाद्यान के घोर अभाव के कारण अंग्रेजी सेनाओं को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिसका नतीजा यह हु्ा कि भलाया, सिंगापुर अौर थाईलैंड पर जापानी सेना का अधिकार हो गया। इस युद्ध में जापानी सेना ने पचपन हजार हिंदुस्थानी सैनिकों को बंदी बना लिया जो अंग्रेजी सेना के अधीन जापानी सेनाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। इन हालातों में राम सिंह ठाकुर भी जापानी सेना के हाथों पकड़े गए।

1942 में अाजाद हिंद फौज में शामिल हुए

एक दिसंबर 1942 को नेताजी सुभाष चंद्र बोष के अधीन अाजाद हिंद फौज (अाइएनए) का गठन हुअा। जपानी सैनिकों द्वारा कैद किए गए पचपन हजार सैनिकों में से 12 हजार सैनिक स्वेच्छा से अाजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। उन स्वयंसेवियों में कैप्टन राम सिंह ठाकुर भी शामिल थे। संगीत में विशेष दक्षता रखने कि वजह से तथा संगीत के प्रति उनकी अधिक रूची लग्न अौर मेहनत को देखते हुए राम सिंह ठाकुर को अाइएनए बैंड में कप्तान रैंक से रवाजा गया। वैसे भी कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने अाजाद हिंद फौज का गठन करने में भी अपनी सक्रियता भूमिका निभाई थी। उन्होंने जापान द्वारा बंदी बनाए गए हजारों सैनिकों के मध्य जाकर अपने गीतों से, संगीत द्वारा अभिनय अौर मिश्रित भाषणों द्वारा अाजाद हिंद फौज में वालेंटेयरी भर्ती होने के लिए कैदी सैनिकों को प्रेरणा दी। अाजाद हिंद रेडियो स्थापित होने के बाद कैप्टन राम सिंह ठाकुर सिंगापुर अौर रंगूल रेडियोस्टेशन में संगीत निर्देशन के रूप में कार्य करते रहे।

कैप्टन राम सिंह को नेताजी सुभाष चंद्र बोसल ने दी थी शाबाशी

तीन जुलाई 1943 को नेताजी सिंगापुर पहुंचे तो उनके स्वागत सम्मान में कैपट्न राम सिंह ठाकुर के निर्देशन में एक गीत सुभाषजी सुभाष जी वो जाने हिंद अा गए। इस गीत से नेता जी इअति प्रभावित हुए। तब से नेताजी ने कैपट्न राम सिंह टाकर को कांधे पर शाबाशी की थपकी दी। यह कहा कि अब तुम सरल अौर सुगम कौमी तराना बनाओं, जिसे अाजाद हिंद फौज के सभी वीर सैनानी अापन में मिलकर खूब जोश में गा सकें।

कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने अपने साथी लेखक मुमताज हुसैन से मिलकर उनेकों देश प्रेम व देश भक्ति गीतों की रचना की। जिन्हें बाद में रेडियों में प्रस्तारित किया गया।

कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा ये जिंदगी है कौम की तु कौम पे लुटाए जा....भारत के जान निसारों हिलमिल के गीत गाओ हिंदुस्तान हमारा है.......शीश झुकार भारत माता तुझको करूण प्रणाम........सबसे ऊंचा दुनाका में प्यारा तिरंगा झंडा हमारा............शुभ चैन कि बरखा बरसे भारत भाग्य है जागा ,,,,,,,,हे वीर बालक हो जाति लाई सुधारो नेपाली में ........सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तानन हमारा हम बुलबुले हैं इसकी यह गुलशितां हमारा अादि गीत गाये।

1943 में भेंट किया था अपना वायलन

21अक्टूबर 1943 के दिन कैप्टन राम सिंह ठाकुर को उत्कृष्ट कार्यो के लिए नेताजी ने जर्मन निर्मित अपना वायलन भेंट किया। .

23 जनवरी 1944 को नेताजीत सुभाष चंद्र बोष के जन्मदिन पर उत्सव पर कैप्टन राम सिंह ठाकुर को नेताजी ने स्वर्ण पदक से अलंकृत किया। मई 1945 में अंग्रेजी सेना ने रंगूल पर अपना कब्जा जमा लिया। जिसकी वजह से अाजाद हिंद फौज के अन्य सैनिकों के साथ कैपटन राम सिंह ठाकुर भी जंगी कैदी बना लिए अौर उन्हें भारत लाकर दिल्ली के लाल किले में जेल में बंद कर दिया। इस प्रकार कैप्टन राम सिंह ठाकुर दो बार जंगी कैदी बने। पहले जापानी सैनिकों के हातों कैदी हुए दूसरी बार अंग्रेजी सेना ने उनहें कैद कर लिया।

एेसे रिहा हुए कैप्टन राम सिंह

कैप्टन राम सिंह ठाकुर के ऊपर शस्त्र विद्रोह करने, संगीत के माध्यम से अाइएनए के सैनिकों अौर अाम जनतो को अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ प्रचार प्रसार द्वारा उकसाने व उनका नेतृत्व करने जैसे गंभीर अभियोग लगाकर मुकदमा चलयाा गया। इस अभियोग के मुताबिक संभव था कि कैप्टन राम सिंह ठाकुर को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाता। लेकिन कैप्टन राम सिंह की खुशकिसमत थी कि जनरल शाह नवाज कर्नल ढिल्लों अौर कर्नल सहगल का केस अंग्रेजी सरकार हार गए। जिसकी वजह से अंग्रेजी सरकार को मजबूरन होकर अाजाद हिंद फौज के सभी जंगी कैदियों के साथ कैप्टन राम सिंह ठाकुर को भी रिहा करना पड़ा।

देश अाजाद होने से पहले नेहरु व महात्मा गांधी से हुई भेंट

1946 में ही अंग्रेज सरकार ने भारत को अाजाद करने का मनसूबा बना लिया था। अाजादी भारत की दहलीज पर थी। अाजादी की घोषणा कभी भी हो सकती थी, जवाहर लाल नेहरू व महात्मा गांधी ने ख्याति प्राप्त कर चुके कैप्टन राम सिंह ठाकुर से मुलाकात की अौर अाजादी के बाद किस तरह से संगीत व धुन लाल किले में प्रस्तुत किए जाएं इस पर चर्चा की। 15 अगस्त 1947 को देश अाजाद हुअा, नेहरू प्रधानमंत्री बने। किले पर ध्वज लहराया गया। कैप्टन राम सिंह के नेतृत्व में निर्देशन में अाइएनए अारकेसट्रा कलाकारों ने कौमी तराना शुभ चैन की बरखा बरसे भारत भाग्य है जागा कि धुन बजाई। बाद में स्वतंत्र भारत मे राष्ट्रय गान जन गण मन अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाया के लिए अपनाया गया। 1948 में उत्त प्रदेश सरकार ने पूरी अारकेस्टरा बैंड टीम को अपने पीएसी बैंड में भर्ती कर लिया। पीएसी बैंड में 26 वर्षों की सेवा के बाद डीएसपी के पदवीं से सेवानिवृत्त हुए।

कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने तैयार की थी राष्ट्रगान की धुन

अाजाद भारत का जन गण मन अाजादी से पहले गाया जाथा था सुख चैन की बरसा बरसे भारत भाग्य है जागा अब अाजाद भारत में इसे राष्ट्रगान के तौर पर गाया जाता है। जिसकी धुन कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने तैयार की थी।

No comments