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जीवन मे कुछ बड़ा करने के लिए किस्मत नहीं हिम्मत चाहिए

जीवन मे कुछ बड़ा करने के लिए किस्मत नहीं हिम्मत चाहिए






इंगलिश मे एक कहावत है You cannot change your luck but you can make it। किस्‍मत loser का गहना है। उनकी लाइफ मे छोटा सा भी चैलेंज आ जाए तो वो अपनी किस्‍मत को कोसने लगते है। किस्‍मत को दोषी बनाकर अपनी कमियों को छुपाने का प्रयास करते है। उनकी नजर मे उनके साथ जो भी बुरा हो रहा है वह उनकी बुरी किस्‍मत के कारण हो रहा है इसमे इनकी कोई कमी या गलती नही है। लेकिन winner कुछ ओर सोचते है उनकी dictionary मे किस्‍मत नाम का कोई शब्‍द ही नही होता। वो अपनी फेलियर की जिम्‍मेवारी अपने ऊपर लेकर उसमे हुई गलती और उनके प्रयासो मे जो कमी र‍ह गई है उसको दूर करके फिर से प्रयास करते हैं और तब तक उस काम के पीछे लगे रहते है जब तक उसमे सफल नही हो जाते। वो किस्‍मत के सहारे नही बैठे रहते बल्कि वो कुछ बड़ा करने की हिम्‍मत रखते है। आज की दो कहानीयां भी यही सिखाती है।

जैक मां पहली कहानी है दुनिया के 21वें सबसे पावरफुल व्‍यक्ति के बारे मे। यह व्‍यक्ति स्‍टार्ट अप बिजनेस का रोल मॉडल है। दुनिया के 50 ग्रेटेस्‍ट लीडर मे उनका नंबर दूसरा है। एक गरीब परिवार मे पैदा हुआ यह व्‍यक्ति आज 25 बिलियन डॉलर का मालिक है। मै बात कर रहा हूँ चाइना में इंटरनेट क्रांति लाने वाले चाइना के सबसे अमीर व्‍यक्ति मा युन उर्फ जैक मा की। जैक मा का जन्‍म एक गरीब परिवार मे हुआ। उनके अंदर एक ऐसी लगन थी जो किसी की भी किस्‍मत पलट सकती है। वह है कुछ नया सीखने की लगन। 

इसीलिए वह रोज 17 मील साईकल चलाकर विदेशी टूरिस्‍ट को गाइड की सर्विस देने के लिए जाता था। उस सर्विस के बदले वह उनसे फीस के नाम पर इंगलिश सीखता था। उनमे से एक टूरिस्‍ट ने उसका नाम जैक रखा। जैक ने पढ़ने के लिए 10 बार हैवर्ड युनिवर्सिटी में आवेदन किया लेकिन हर बार उनको रिजेक्‍ट कर दिया गया। जैक ने इसके लिए किस्‍मत को दोष नही दिया। उसने अपने देश मे ही रहकर ग्रैजुएश्‍न पूरा करके नौकरी की तलाश शुरू की। उसने 30 अलग-अलग जोब्‍स के लिए आवेदन किया लेकिन यहां भी उनको हर बार रिजेक्‍ट कर दिया गया। एक बार उसने KFC मे जोब के लिए एप्‍लाई किया इस जोब के लिए उनके अलावा 23 ओर लोगों ने एप्‍लाई किया था उस जोब के लिए जैक के अलावा बाकि 23 के 23 लोगो को चुन लिया गया। 

जैक ने उसके बाद पुलिस मे जोब के लिए एप्‍लाई किया उसमे कुल पाँच लोगों ने आवेदन किया जिसमे से चार लोगों को तो चुन लिया गया अगर किसी को नही चुना गया तो वह था जैक मा। उसको केवल इतना कह कर रिजेक्‍ट कर दिया कि तुम अच्‍छे नही दिखते। इतनी जगह से रिजेक्‍शन के बाद भी जैक ने कभी किस्‍मत को दोष नही दिया। उसके अंदर कुछ नया करने की लगन हमेशा से थी। 

उसने इंटरनेट के बारे मे सीखकर 1999 मे अलीबाबा डॉट कॉम की शुरूआत की। उसकी अलीबाबा डॉट कॉम जितने प्रॉडक्‍ट बेचती है उतने इबे और अमेजन दोनो मिलकर भी नही बेच पाती। अलीबाबा डॉट कॉम की वर्थ फेसबुक से भी ज्‍यादा है। जैक इतनी कामयाबी, दौलत और शोहरत केवल इसलिए हासिल कर पाए क्‍योकि वो अपनी किस्‍मत को दोष देने की बजाए पूरी लगन के साथ अपने प्रयास करते रहे। एक जगह से असफल होने के बाद हार कर नही बैठ गए बल्कि दूसरे फील्‍ड मे प्रयास करते रहे। किस्‍मत एक दरवाजा बंद करती तो जैक दूसरा दरवाजा खटखटा देता। एक जगह संभावनाएं खत्‍म होती तो जैक दूसरी जगह संभावनाएं तलाशने लगता। उनका एक लक्ष्‍य है कि Go Big or Go Home.

अब्राहम लिंकन दूसरी कहानी एक ऐसे शख्‍स की है जो पूरी जिंदगी अपनी खराब किस्‍मत से लड़कर दुनिया के सबसे ताकतवर देश की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठ गया। मै बात करने वाला हूँ अमेरिका के 16वे राष्‍ट्रपति अब्राहम लिंकन की। इनका जन्‍म इतने गरीब परिवार मे हुआ जिसके पास रहने के नाम पर केवल लकड़ी का बना एक केबिन था। गरीबी के कारण पढ़ने के लिए कोई साधन नही था अब्राहम लिंकन के अंदर बुरी किस्‍मत पर शौक मनाने से ज्‍यादा पढ़ने की लगन थी।

 उन्‍होने प्राइमरी तक की शिक्षा अपने दम पर स्‍ट्रीट लाइट के नीचे बैठ कर की। बच्‍पन से लेकर जब तक वो जिंदा रहे उनकी किस्‍मत ने कभी भी उनका साथ नही दिया। अब्राहम लिंकन सात साल के थे तो उनके परिवार से उनका घर छीनकर उनको बाहर कर दिया गया। जब वो नौ साल के थे तो उनकी माँ की मौत हो गई। 19 साल की उम्र मे पहुँचे तो जिसके वो सबसे ज्‍यादा करीब थे उनकी बहन उनका साथ छोड़ गई। 22 साल की उम्र मे बिजनेस करने निकले तो उसमें फेल हो गए। 26 साल की उम्र मे जिस लड़की से वो प्‍यार करते थे उसकी मौत हो गई। 

27 साल की उम्र मे उनको नर्वस ब्रेकडाउन हो गया। 33 साल की उम्र मे उन्‍होने शादी की जिससे उनके चार बेटे हुए। चार मे से तीन बेटों की मौत हो गई। पहले बेटे की मौत चार की उम्र मे हो गई, दूसरे की 12 साल और तीसरे की 18 साल की उम्र मे। किस्‍मत जब भी अब्राहम लिंकन के साथ खेलती वो और मजबूत हो जाते। हर मुसीबत के बाद हिम्‍मत हारने की बजाए वो फिर से उठ खड़े होते। जीवन मे दो बिजनेस मे असफल हुए। आठ बार चुनाव हारे लेकिन डटे रहे और 51 साल की उम्र मे अमेरिका के 16वे राष्‍ट्रपति की शपथ ली। यहां भी उनकी बुरी किस्‍मत ने उनका साथ नही छोड़ा। राष्‍ट्रपति बनने के बाद उनको सिविल वार का सामना करना पड़ा। अब्राहम लिंकन ने सिविल वार को भी जीत लिया। 

उन्‍होने अमेरिका से दास प्रथा का अंत कर दिया। अमेरिका मे रहने वाले अश्‍वेतों को चुनाव का अधिकार दिलवाया। उनके इसी निर्णय से चिड़कर जॉन विल्‍किंस बूथ ने 57 साल की उम्र मे गोली मारकर उनकी हत्‍या कर दी। बुरी किस्‍मत लेकर ही वो इस दुनिया मे पैदा हुए और बुरी किस्‍मत ने ही उनकी जान ले ली। अब्राहम लिंकन की किस्‍मत बुरी थी लेकिन उनका हौंसला बुरा नही था। हर बार गिरने के बाद वो फिर से उठ खड़े होते और किस्‍मत को हरा देते। जब किस्‍मत पूरा जीवन अपनी पूरी ताकत लगाकर भी उनको हरा ना सकी तो उनकी जान ही छीन ली।

जो विजेता होते है किस्‍मत उनको कभी हरा नही सकती। किस्‍मत उनके रास्‍ते मे अड़चने खड़ी कर सकती है लेकिन उनके हौंसलो को नही कैद कर सकती। एक बात याद रखना कि सफलता किस्‍मत से लड़कर ही मिलती है। कभी यह आशा मत रखना कि किस्‍मत बांहे फैलाकर आपका स्‍वागत करेगी। वह आपका रास्‍ता रोकने का हर संभव प्रयास करेगी। आपको कमजोर करने की पूरी कोशिश करेगी लेकिन जो डटा रहा वो सफल बनेगा।

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