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कई बीमारियों की एक दवा है यह बेल, फायदे जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

कई बीमारियों की एक दवा है यह बेल, फायदे जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

गिलोय एक ऐसी बेल है, जिसे हम बहुत सारी बीमारियों की एक दवा बोल सकते हैं। यह न केवल देखने में सुंदर लगती है बल्कि इसके औषधीय गुणों के कारण यह बहुत सारी बीमारियों की रामबाण दवा के रूप में भी कार्य करती है। आयुर्वेद में कड़वे स्वाद वाली गिलोय को कई बीमारियों के उपचार में फायदेमंद जड़ी-बूटी बोला गया है। इस बेल का पत्ता पान के पत्ते की तरह ही दिखता है। आयुर्वेद में इसे अमृता, गुडुची, चंक्रांगी आदि नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर गिलोय को जूस, काढ़ा, पावडर या गिलोय वटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

आर्थराइटिस
गिलोय का पावडर दूध के साथ 2-3 बार सेवन करने से गठिया में फायदा मिलता है। एक चम्मच गिलोय का रस और त्रिफला को आधा कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पिएं। रस में अदरक का रस भी मिला सकते हैं। एक चम्मच गिलोय के चूर्ण को घी के साथ लें। अरंडी या कैस्टर ऑयल के साथ मिलाकर जोड़ों पर लगाएं।

प्यास, जलन, डायबिटीज कुष्ठ और पीलिया आप गिलोय के इस्तेमाल से प्यास, जलन, डायबिटीज कुष्ठ और पीलिया रोग में लाभ ले सकते हैं। इसके साथ में ही यह आंखों के लिए भी फायदेमंद होती है।

रोग प्रतिरोधक
गिलोय में उपस्थित एंटी ऑक्सीडेंट तत्व हमारे शरीर से विषैले पदार्थ को बाहर निकाल देते हैं और हमारे खून को साफ कर देते हैं। इसके साथ में ही शरीर को ऊर्जा भी देते हैं। गिलोय की चार-छह इंच लंबी डंडी को अच्छे से छील लें और आधा पानी मिलाकर मिक्सी में पीस ले। अब इससे अच्छे से छान कर एक स्पून शहद मिलाकर प्रातः खाली पेट पिएं. इसे आपको लाभ मिलेगा।

त्वचा और बालों को रखे स्वस्थ
एंटी एजिंग गुणों के कारण गिलोय के नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है, दाग-धब्बे दूर होते हैं। गिलोय की पत्तियों को पीस कर बने पेस्ट में अरंडी या नीम का थोड़ा-सा तेल गर्म करके मिलाएं। गिलोय का तेल थोड़े-से दूध में मिलाकर हल्का गर्म करें। इसे फटी त्वचा पर लगाने से त्वचा कोमल और साफ हो जाती है। इस पेस्ट को त्वचा पर लगाएं। बालों में रुसी, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की समस्याएं दूर होती हैं

सर्दी-जुकाम-बुखार
इस बरसात के मौसम में होने वाले डेंगू, मलेरिया जैसे बुखार के कारण से ब्लड प्लेटलेट्स कम होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर गिलोय का इस्तेमाल लाभदायक होता है। एक कप पानी में चार-छह इंच लंबी गिलोय की डंडी कूट कर डाल दें। पानी आधा रह जाने पर बने इस काढ़े में शहद को मिलाकर पीने से बार-बार होने वाला बुखार अच्छा हो जाता है। प्लेटलेट्स कम होने पर गिलोय और ऐलोवेरा के रस के जूस को मिलाकर उपयोग करना फायदेमंद होता है।

मोटापा दूर करे
गिलोय शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है। जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है और शरीर में अतिरिक्त फैट कम होता है। एक चम्मच गिलोय और त्रिफला पावडर सुबह-शाम शहद के साथ लें। दिन में एक बार गिलोय, हरड़, बहेड़, शिलाजीत और आंवला मिलाकर काढ़ा पिएं।

डायबिटीज
हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट होने के कारण से गिलोय ब्लड शुगर स्तर को कम कर देती है। लौंग, अदरक, तुलसी मिलाकर बने गिलोय का काढ़ा बना ले और इसका सेवन करें।

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