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क्या आम आदमी पार्टी को मिलेगा जनता का साथ या कठिन है डगर अभी!

क्या आम आदमी पार्टी को मिलेगा जनता का साथ या कठिन है डगर अभी!

जैसे ही आज आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नेशनल काउंसिल की 9वीं मीटिंग में यह ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी अगले साल होने वाले 6 राज्यों के चुनावों में उम्मीदवार उतारेगी कार्यकर्ताओं के अंदर ऊर्जा का संचार हो गया है। कार्यकर्ता पूरी तरह से एक्टिव हो गए हैं और बधाइयों का दौर चल पड़ा है।

अब एक बात जिसका अरविंद केजरीवाल ने भी ज़िक्र किया है अपने भाषण में की पूरे देश के लोग पसन्द तो करते हैं आम आदमी पार्टी को परन्तु वोट देने की बात करने पर लोग यह कह कर वोट नहीं देते कि अभी संगठन मजबूत नहीं है।

बात बिल्कुल साफ है कि लंबी दूरी है जो अभी आम आदमी पार्टी को तय करनी है। लोगों के दिलों में विश्वास पैदा करना कि आम आदमी पार्टी ही तीसरा विकल्प है। और यह भी एक सच्चाई है कि यह रातोंरात नहीं होने वाला इसलिए कार्यकर्ताओं को धैर्य रखना होगा। दूसरी सबसे बड़ी जो समस्या आम आदमी पार्टी को आने वाली है कि इन राज्यों के अधिकतर जो पुराने कार्यकर्ता हैं खुद को टिकट का दावेदार या किसी ना किसी पद की उम्मीद करते हैं और यह सब जानते हैं कि टिकट या पद हर किसी को नहीं दिया जा सकता। परन्तु नई पार्टी अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रही है तो कार्यकर्ताओं को लगता है कि उन्हें इसका लाभ जरूर मिलना चाहिए।

जब तक कार्यकर्ताओं के मन में देश के हालात बदलने या लोगों के प्रति सेवा की भावना पैदा नहीं होती तब तक संगठन मजबूत नहीं होगा। इसलिए अभी आम आदमी पार्टी को दृढ़ता के साथ डटे रहना होगा।

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