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मां कुष्मांडा मंदिर: रहस्य है पिंडी से रिसता पानी, हर मर्ज की है ये दवा

मां कुष्मांडा मंदिर: रहस्य है पिंडी से रिसता पानी, हर मर्ज की है ये दवा

कानपुर से 60 किमी दूर घाटमपुर ब्लॉक में मां कुष्मांडा देवी का अद्भुत मंदिर है। दुर्गा के नौ रूपों में से एक रूप देवी कुष्मांडा इस प्राचीन मंदिर में लेटी हुई मुद्रा में हैं। पिंड स्वरूप में लेटी मां कुष्मांडा से लगातार पानी रिसता रहता है। कहते हैं इस जल को पीने से कई तरह की बीमारियां दूर हो जाती हैं। हालांकि, यह अब तक रहस्य बना हुआ है कि पिंडी से पानी कैसे निकलता है। तो आइए जानते हैं माता कुष्मांडा की कहानी।

शिव महापुराण के अनुसार, भगवान शंकर की पत्नी सती के मायके में उनके पिता राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था। इसमें सभी देवी देवताओं को आमंत्रित किया गया था। लेकिन शंकर भगवान को निमंत्रण नहीं दिया गया था। माता सती भगवान शंकर की मर्जी के खिलाफ उस यज्ञ में शामिल हो गईं। माता सती के पिता ने भगवान शंकर को भला-बुरा कहा था, जिससे अक्रोशित होकर माता सती ने यज्ञ में कूद कर अपने प्राणों की आहुति दे दी। माता सती के अलग-अलग स्थानों में नौ अंश गिरे थे। माना जाता है कि चौथा अंश घाटमपुर में गिरा था। तब से ही यहां माता कुष्मांडा विराजमान हैं।

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