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बॉर्डर पर किसानों का धरना खत्म, हटाए गए बैरिकेड, किसान वापस घर लौटे

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुईं हिंसा का नुकसान किसानों पर ही हुआ है। पहले दो किसान संगठनों ने आंदोलन से अलग होने का एलान किया तो वहीं अब एक लाख किसान वापस अपने घर लौट गए हैं। वे दिल्ली में हुई हिंसा से आहत होने के बाद आंदोलन को छोड़ कर बॉर्डर से वापस लौट गए। बता दें कि चिल्ला बॉर्डर पर अब किसानों का धरना खत्म हो गया है।
चिल्ला बॉर्डर पर किसानों का धरना खत्म, हटाए गए बैरिकेड
दरअसल, दिल्ली की सीमा को दो महीने से घेर कर बैठे किसानों के बीच अब टकराव हो गया है। किसान आंदोलन दो भाग में बंट गया है।दिल्ली में ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा से किसान नाराज हैं और अब उन्होंने धरना प्रदर्शन में शामिल न होने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में नोएडा के चिल्ला बॉर्डर पर किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने धरना समाप्त समाप्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि चिल्ला बॉर्डर पर मौजूद एक लाख किसान अपने अपने घर वापस लौट गए हैं।

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एक लाख किसान वापस घर लौटे

किसानों का कहना है कि वह हिंसा को लेकर आहत हैं और कुछ उपद्रवियों की वजह से किसानों की बदनामी हो रही है। वहीं उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमारे लिए पहले देश हैं, इसलिए हम धरना प्रदर्शन खत्म कर रहे हैं। किसानों के इस कदम के बाद महीनों से बाधित ट्रैफिक दोबारा खुल जाएगा। नोएडा एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि जल्द ही चिल्ला बॉर्डर पर आवागमन पहले जैसा हो जाएगा। फ़िलहाल पुलिस ने बैरिकेडिंग हटा दी है।

दिल्ली-जयपुर हाईवे से भी हटे किसान

इसके अलावा किसानों ने NH-8 को खाली कर दिया है। रेवाड़ी के 20 गांवों की पंचायत ने किसानों को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इसी के साथ दिल्ली-जयपुर हाइवे खाली हो गया। बता दें कि पिछले डेढ़ माह से मसानी बैराज पर बीच सड़क पर आंदोलनकारी धरना दे रहे थे।

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