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हिमाचल: बेलचे से बर्फ खोद दौड़ाई 108 और अस्पताल पहुंचाई महिला, जज़्बे को सलाम

हिमाचल: बेलचे से बर्फ खोद दौड़ाई 108 और अस्पताल पहुंचाई महिला, जज़्बे को सलाम

कुल्लू: 108 एंबुलेंस सेवा जहां बीमारी से जूझ रहे और हादसों का शिकार हुए लोगों को जीवनदान देने का काम कर रही है, तो वहीं कई जगह विकट भौगोलिक परिस्थितियों में 108 एंबुलेंस का स्टाफ चुनौतियों से जूझकर भी लोगों के जीवन को सुरक्षा प्रदान कर रहा है। ऐसा ही एक मामला जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति में पेश आया। यहां केलांग से एक गंभीर मरीज को लेकर 108 एंबुलेंस कुल्लू तो पहुंच गई, लेकिन वापस जाते समय बर्फबारी का दौर लगातार जारी रहा और सड़क पर बर्फ की परत और मोटी होती जा रही थी। जैसे ही 108 एंबुलेंस का पायलट और दो फार्मासिस्ट मनाली की तरफ से टनल पार करते हुए नॉर्थ पोर्टल पहुंचे, तो वहां से करीब डेढ़ फुट मोटी परत पर एक एंबुलेंस को आगे बढ़ाना शून्य से नीचे तापमान में उनके लिए चुनौती था।

लिहाजा, पायलट गोपाल बोध और फार्मासिस्ट जयललिता और लक्ष्मी चंद ने स्वयं ही एंबुलेंस के भीतर पड़ा बेलचा उठाया और सड़स से बर्फ हटाने का काम शुरू किया। ग्लेशियर प्वाइंट पर कड़ी चुनौती के साथ बेलचा लेकर बर्फ को हटाया गया। एंबुलेंस के लिए रास्ते बनाते गए और आगे बढ़ते गए। तीनों के सामने चुनौती यह थी कि एक तरफ जहां सड़क पर बर्फ की मोटी परत को हटाकर एंबुलेंस को आगे बढ़ाना, जबकि दूसरी तरफ बर्फबारी का दौर जारी था और साथ में हवाओं के साथ पहाडि़यों से आ रही बर्फीली हवा, जो अपने साथ बर्फ समेटकर बर्फ सड़क पर ला रही थी, जो उनकी मुसीबत और बढ़ाने का काम कर रही थी। जैसे-तैसे करीब चार-पांच किलोमीटर के इस सफर को बर्फ हटाते हुए पूरा किया और उसके बाद बीआरओ की मशीनरियां स्नो कटर, जेसीबी मिले। उसके बाद ही उन्हें सड़क वाहन चलाने योग्य मिले। 108 एंबुलेंस सेवा के प्रभारी आशीष ने टीम की हौसलाफजाई की।

हटानी पड़ी गाडि़यां: एंबुलेंस में तैनात पायलट गोपाल बोध ने बताया कि जब केलांग से मरीज को कुल्लू की तरफ ला रहे थे, तो अटल टनल के साउथ पोर्टल में धुंधी के पास बर्फीले रास्ते को पार करने में चुनौतियां सामने आईं। जो वाहन यहां सड़क में बर्फ के बीच फंसे थे, उन वाहनों को भी कई जगह बीच सड़क से किनारे लगाना पड़ा, तब जाकर सांस लेने की दिक्कत वाली महिला मरीज को समय पर कुल्लू पहुंचाया जा सका और उसके बाद वापस जाने में भी उन्हें कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

Source divyahimachal





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