Breaking News

पुरुषों को नहीं पहनने चाहिए Tight Clothes, सेहत को हो सकता है यह बड़ा नुकसान

पुरुषों को नहीं पहनने चाहिए Tight Clothes, सेहत को हो सकता है यह बड़ा नुकसान

आज-कल टाइट कपड़े (Tight Clothes) पहनने का फैशन (Fashion) ट्रेंड में है. लेकिन अगर आप फैमिली प्लानिंग (Family Planning) करने के बारे में सोच रहे हैं तो टाइट कपड़े आपकी मुसीबत बढ़ा सकते हैं. अमेरिका में हुए शोध (Male Infertility Research) के मुताबिक, टाइट कपड़े पहनने से यौन क्षमता (Sexual Ability) पर गंभीर असर पड़ता है.

शोध में यौन समस्याओं से ग्रसित 656 पुरुषों पर स्टडी (Study) की गई, जिसमें सामने आया कि फैमिली प्लानिंग (Family Planning) के बारे में सोच रहे पुरुषों को टाइट नहीं, बल्कि ढीले कपड़े पहनने चाहिए. ढीले कपड़े पहनने से शुक्राणु (Sperm) और उनकी गुणवत्ता बढ़ती है.
शोध में सामने आईं अहम बातें

यह शोध हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Harvard T.H. Chan School of Public Health) ने किया है. शोधकर्ताओं ने इसमें उन पुरुषों (Men) को शामिल किया, जो पिता बनने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं. शोध में पुरुषों के खान-पान, दिनचर्या (Men Lifestyle), नींद की गुणवत्ता, सिगरेट-शराब का सेवन और पहनावे पर भी स्टडी की गई.






शोध में सामने आया कि टाइट कपड़ों के बजाय ढीले कपड़े पहनने वाले पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या 17 फीसदी ज्यादा थी. इसके अलावा शुक्राणुओं (Sperm) में अंडाणुओं तक पहुंचने की क्षमता भी 33 फीसदी ज्यादा पाई गई.

शुक्राणुओं की उत्पादन क्षमता पर पड़ता है असर

शोधकर्ता एलन पेसी के अनुसार, किसी भी पुरुष में शुक्राणुओं (Sperms) की उत्पादन क्षमता उसके यौन अंग के तापमान पर निर्भर करती है. यौन अंग का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने पर मस्तिष्क एफएसएच (FSH) के स्त्राव को कम कर देता है. यौन अंग को शुक्राणुओं का उत्पादन करने का निर्देश एफएसएच हार्मोन (FSH Hormone) ही देता है. टाइट कपड़े पहनने वाले पुरुषों में इसकी मात्रा 14 फीसदी कम देखी गई है.

ढीले कपड़े पहनने से तीन महीने में होता है सुधार

डॉक्टर जॉर्ज शेवरो ने अनुसार, इस शोध से टाइट कपड़े (Tight Clothes) पहनने वाले पुरुषों को बिल्कुल भी परेशान नहीं होना चाहिए. दरअसल, 3 महीने तक ढीले कपड़े पहनने से शुक्राणुओं के उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है. इस शोध के नतीजे जर्नल ‘ह्यूमन रिप्रोडक्शन’ (Human Reproduction) के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं.

No comments