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इस दवा के प्रयोग से मिर्च एवं बैंगन की फसल को कीट, रोगों से बचाएं

इस दवा के प्रयोग से मिर्च एवं बैंगन की फसल को कीट, रोगों से बचाएं

मिर्च, बैंगन की खेती करने वाले किसान अक्सर एक सवाल पूछते रहते हैं, मिर्च की फसल में कीट तथा रोग के लिए किस दवा का प्रयोग करें या कहें की वह अपने मिर्च एवं बैंगन की फसल को किस तरह स्वस्थ अवं सुरक्षित रखें | कभी फसल में पत्ती पिली हो जाती है तो कभी पौधे ही सुख जाते हैं |

 जिससे किसानों को काफी नुकसान होता है | इन सभी समस्या से बचाव के लिए किसान समाधान ने सभी किसानों के लिए बैंगन तथा मिर्च की फसल के बचाव के लिए कीटनाशक का नाम तथा उसका उपयोग लेकर आया है | रस चुसक कीट :- कीटनाशक के प्रयोग से पहले कीट को पहचानना जरुरी है | अगर आप के पौधे के पत्ती के निचले हिस्से में छोटे – छोटे कीट दिखाई दे रहे हैं, पत्तियां पिली हो रही है , फूल झड रहे हैं | 

तो आपके पौधे में सफ़ेद मक्खी, मोईला, रसद कीट, हरा तेला बरुथी कीट लग गया है | कभी – कभी यह इतनी छोटी होती है की आँखों से दिखाई नहीं देती है | इस तरह के कीट पत्ती के अन्दर जाकर रस चूसते रहते हैं | जिससे पत्ती पिली पड़ने लगती है | यह कीट फूलों में भी लग जाते है जिससे पौधे का फूल झड़ने लगते है | यह भी पढ़ें इन आठ जिलों के किसानों को जल्द दिया जायेगा फसल नुकसानी का मुआवजा रोकथाम खेत को खरपतवार मुक्त रखें , क्योंकि इस तरह के कीट का निवास स्थान इसी खरपतवार में रहता है | इसके अलावा रासायनिक रोकथाम के लिए इनमें से कोई भी एक कीटनाशक उपयोग कर सकते हैं |

 इमिडाक्लोप्रिड – 1 एम.एल./3 लीटर पानी में छिड़काव करें | डाइमिथोएट – 1 एम.एल./ 1 लीटर पानी में छिड़काव करें | रोगोर – 1 एम.एल./ 1 लीटर पानी में छिड़काव करें | इसके अलावा देशी कीटनाशक का भी प्रयोग कर सकते हैं | इसके लिए नीम की पत्ती, धथुरा, आक तिनों कि पत्तियां 10 किलोग्राम / 100 लीटर पानी के साथ घोलकर बनाकर छिड़काव करें | फली छेदक :- किसान भाई आपकी फसल में दुसरे तरह का कीट भी होते है जो फलों को छेदता है जिससे फल खराब हो जाता है और बाजार में अच्छी कीमत नहीं मिलती है | यह कीट हरे कलर तथा कभी – कभी सफ़ेद कलर में भी होती है और इसकी लम्बाई 2 – 3 से.मी. रहती है | रोकथाम :- किंवनालफास कीटनाशक – 1 एम.एल./ 1 लीटर पानी में छिड़काव करें | अगर इसके बाद भी इस तरह की कीट नहीं खत्म होता है तो 15 दिन के बाद दूसरी बार छिड़काव करें | 

दीमक का प्रकोप : दीमक पौधों के जड़ में लगता है | इस तरह के कीट भी दो तरह के होते हैं एक दीमक होता है जो पौधे के जड़ में लगकर पौधे के जड़ को काट देता है | जिससे पौधा सुख जाता है | इसकी पहचान यह है की सूखे हुये पौधे को जब हाथ से खिचेंगे तो आसानी से मिटटी से बाहर आ जाता है | दुसरे तरह के कीट को उकटा कहते हैं यह भी पौधे के जड़ में ही लगता है तथा यह जड़ को कटता है जिससे पौधे सुख जातें है |

 इसकी पहचान यह है की सूखे हुये पौधे को जब हाथ से खिचेंगे तो आसानी से मिटटी से बाहर नहीं आता है | यह भी पढ़ें किसान अधिक आय के लिए इस तरह करें शरदकालीन गन्ने की बुआई रोकथाम :- दीमक खेत में सूखे हुये गोबर जो पूरी तरह से नहीं सूखा है इसके कारण लगता है | इसलिए जब भी खेत में गोबर की खाद डाले तो यह देख लें की गोबर का खाद सूखा है की नहीं | 

रासायनिक उपाय मेटाराइजीयम बायेरीया इन दोनों में से किसी एक को 5 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से गोबर की खाद में मिलाकर बुआई से पहले छिड़काव कर दे | इसके अलावा क्लोरोफाईस कीटनाशक को 4 लीटर / हे. की दर से पौधों पर छिड़काव करें | इससे दीमक की समस्या से निजात पा सकते हैं |

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