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अनपढ़ सास व ससुर ने बहू को बेटी मानकर पढ़ाया…बहू ने भी पढ़कर IAS बनी और बेटी का फ़र्ज निभाया

अनपढ़ सास व ससुर ने बहू को बेटी मानकर पढ़ाया…बहू ने भी पढ़कर IAS बनी और बेटी का फ़र्ज निभाया

मनुष्य यदि कुछ करने का निश्चय कर ले तो वह अपना भाग्य बदलने की ताकत रखता है। चाहे कितनी भी समस्याएँ लक्ष्य के रास्ते में क्यों न आएँ, पर मेहनत और लगन से जिनका नाता है, उनका साथ तो भगवान भी देता है।

हम सबने अक्सर समाज में पारिवारिक मतभेद, लड़ाई और सास बहु के झगड़ों के बारे में सुना है, पर आज का प्रगतिशील समाज अब अपनी सोच भी बदल रहा है। कुछ ऐसी ही बदलती सोच का उदाहरण है एक अनपढ़ सास ससुर और उनकी बहू, जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

दरअसल एक अनपढ़ सास व 10वीं पास ससुर ने अपनी बहू को पढ़ा लिखाकर उसके सपनों को उड़ान दी। बहू ने भी ख़ूब पढ़कर माँ पिता समान सास ससुर का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। यह प्रेरणास्पद कहानी है कमला नगर के शांति नगर में रहने वाली मंजू अग्रवाल के परिवार की, जिन्होंने स्वयं पढ़ा लिखा न होने के बावजूद अपने बच्चों को पढ़ाया। साथ ही अपनी बहू अदिति अग्रवाल (IAS Aditi Agarwal) को बेटी मानकर पढ़ाया और उन्हें IAS ऑफिसर बना दिया।

माता पिता की तरह साथ दिया सास-ससुर ने

हमारे समाज में जहाँ बहुओं के ऊपर कई प्रकार की बंदिशें लगाई जाती है और उन्हें अनेक प्रकार सर प्रता’ड़ित किया जाता है, वहाँ इसी समाज में रहने वाले एक साथ ससुर ने अपनी बहू को बेटी मानकर उसे पढ़ाई करने को प्रोत्साहित किया और उसका पूरा-पूरा साथ दिया, जिससे उनकी बहू अदिति ने अपने पहले ही प्रयास में आईएएस का एग्जाम पास कर लिया।

अदिति अग्रवाल (IAS Aditi Agarwal) की इस कामयाबी के बारे में उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा कि मेरी सफलता का श्रेय मेरी सास मंजू अग्रवाल, ससुर राजीव अग्रवाल तथा पति निशांत अग्रवाल को ही जाता है, क्योंकि उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया।
कालेज के पास बने गंदे नाले के पास रहने वालों को देखा तो किया यह निश्चय

अदिति अग्रवाल ने गाजियाबाद के मोदी नगर के दयावती मोदी पब्लिक स्कूल से 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की। फिर बाद में जब वे कालेज में जाकर पढ़ाई किया करती थीं तो उन्हें अपने मित्रो से यह प्रेरणा मिली, जिससे कि उन्होंने अपने कालेज के निकट बने हुए गंदे नाले के पास रहने वालों को देखा और आईएएस बनने का निश्चय किया, ताकि वे ऐसे लोगों के लिए कुछ कार्य कर पाएँ।

आपको बता दें कि अदिति ने एपीजे स्कूल ऑफ आर्किटेक्ट एंड प्लानिंग ग्रेटर, नोएडा से बीआर्क किया है। साल 2015 में इनका विवाह निशांत अग्रवाल से हुआ था। फिर बाद में उन्होंने IAS के एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी थी और पहली ही कोशिश में इन्हें कामयाबी भी मिली।

IAS परीक्षा के लिए बेसिक मज़बूत रखिए

अदिति ने इस परीक्षा में 282वीं रैंक प्राप्त की। वे बताती हैं कि सिविल सर्विसेज के एग्जाम में सफलता के लिए छात्रों को अपना बेसिक मज़बूत रखना चाहिए। वे यह भी कहती हैं कि जब वह कालेज जाया करती थी तो मोदीनगर मैं नाले के निकट रहने वाले लोगों के बारे में सोच कर परेशान हुआ करती थीं, उन्हें ख़ुशी है कि अब वह ऐसे लोगों के लिए कुछ काम कर सकेंगी, जिससे उन्हें निवास के लिए अच्छी जगह मिल पाए।

IAS अदिति की सराहना हर तरफ़ हो ही रही है लेकिन साथ ही उनके सास ससुर की भी ख़ूब तारीफ हो रही है और होनी भी चाहिए क्योंकि हमारे समाज में ऐसे व्यक्ति कम ही होते हैं जो अपनी बहुओं को बेटी के जैसा प्यार देते हैं और उनके फैसलों का सम्मान करते हुए उनका पूरा-पूरा साथ निभाते हैं। यदि सभी सास ससुर आदित्य अग्रवाल के सास ससुर जैसे हो जाएँ तो सारे माता-पिता की चिंताएँ दूर हो जाएगी और वह ख़ुशी खुशी अपनी बेटियों को ससुराल के लिए विदा कर देंगे।

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