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हिमाचल: पेट दर्द होने से बेहोश हुई महिला को कुर्सी पर बैठा 3 किमी तक पैदल चलकर पहुंचाया सड़क तक, फिर वाहन से पहुंचाया अस्पताल

हिमाचल: पेट दर्द होने से बेहोश हुई महिला को कुर्सी पर बैठा 3 किमी तक पैदल चलकर पहुंचाया सड़क तक, फिर वाहन से पहुंचाया अस्पताल

हिमाचल प्रदेश के कई गांव आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। वहीं कुल्लू जिले में भी ऐसे ही कई गांव हैं। शुक्रवार को तीर्थन घाटी की पेखड़ी पंचायत के गांव नांही में महिला की तबीयत खराब हो गई। इसी के साथ सड़क सुविधा न होने से महिला को कुर्सी पर बैठाकर परिजनों और ग्रामीणों को तीन किमी पैदल चलना पड़ा। इसके बाद वाहन से बंजार अस्पताल पहुंचाया गया। 29 वर्षीय सुजाता मेहता पत्नी रूपेंद्र कुमार को सुबह पेट में तेज दर्द हुआ और वह अचानक बेहोश हो गई। गांव और आसपास के इलाकों में किसी तरह की स्वास्थ्य सुविधा नहीं है।

ऐसे में महिला को परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से कुर्सी से उठाकर तीन किलोमीटर तक पैदल लाया गया। ग्रामीण लोभू राम, दुर्गा दास, दिले राम, गोपाल चंद, इंद्र सिंह शलाठ, घनश्याम, संजय कुमार और रमेश का कहना है कि सड़क के अभाव में बीमार लोगों को इसी तरह कुर्सी या चारपाई पर उठाकर अस्पताल के लिए ले जाना पड़ता है। वहीं इस गांव में डिस्पेंसरी तक नहीं है। लोगों को सर्दी और जुकाम की दवा लेने के लिए भी पांच किलोमीटर का पैदल सफर तय करके गुशैणी पहुंचना पड़ता है। विद्यार्थियों को भी उच्च शिक्षा के लिए मीलों दूर जाना पड़ता है।

वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के विश्व धरोहर बनने से पार्क क्षेत्र से उनके हक छीन लिए गए। पार्क प्रबंधन ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के लिए कुछ भी नहीं किया। वहीं अब यहां के लोग स्वास्थ्य सुविधा के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। लोगों ने सरकार से सड़क के साथ गांव स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग की है। वहीं लोक निर्माण विभाग बंजार के सहायक अभियंता रोशन लाल ठाकुर ने जानकारी देते हुए कहा कि नगलाड़ी नाला से नाहीं-घाट-लाकचा तक सड़क प्रस्तावित है। 

सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी होते ही निर्माण कार्य को शुरू किया जाएगा। अभी तक करीब एक किमी सड़क निर्माण कार्य किया गया है। इसी के साथ पेखड़ी पंचायत के कई गांवों के सड़क के अभाव से लोगों को मीलों तक पैदल चलना पड़ता है। लोगों को खाने-पीने के सामान को भी पीठ पर उठाकर अपने घर पहुंचाना पड़ता है। इस क्षेत्र से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को पांचवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए पांच किमी दूर गुशैणी जाना पड़ता है।

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