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इतिहास के पन्नों से : 19 दिसंबर को आजाद हो गया था गोवा, फिर भी 30 मई बना स्थापना दिवस, जानिए राज

इतिहास के पन्नों से : 19 दिसंबर को आजाद हो गया था गोवा, फिर भी 30 मई बना स्थापना दिवस, जानिए राज

दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करने वाले देश के तटीय राज्य गोवा के लिए दो तारीखों का विशेष महत्व है। ये तारीखें हैं पहली 19 दिसंबर और दूसरी 30 मई। ये दोनों ही कोई सामान्य तारीखें नहीं हैं। ये तारीखें गोवा की मुक्ति से लेकर उसकी उन्नति और प्रगति की द्योतक हैं।

इनमें से 19 दिसंबर, 1961 की तारीख हिंदुस्तान की आजादी के समय तक पुर्तगालियों के कब्जे में रहे गोवा की आजादी का दास्तां को बयां करती है। जबकि, दूसरी तारीख 30 मई, 1987 गोवा के भारतीय संघ का एक पूर्ण राज्य बनने की गवाह है। यही तारीख गोवा का स्थापना दिवस के तौर पर मनाया जाता है। लेकिन यह विचारणीय प्रश्न है कि गोवा की मुक्ति से लेकर उसके भारत के पूर्ण राज्य बनने के सफर में 14 साल का लंबा वक्त क्यों लगा और इस दौरान गोवा किससे अधीन था? तो आइए जानते हैं गोपांचल से आधुनिक गोवा बनने तक का रोचक सफर और 14 साल के इंतजार के पीछे की रोचक कहानी?

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क्षेत्रफल के हिसाब से गोवा भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के हिसाब से चौथा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने सुंदर समुद्री तट और मशहूर स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। 1961 के पहले तक गोवा पुर्तगाल का एक उपनिवेश था। लगभग 450 सालों तक पुर्तगालियों ने गोवा पर राज किया। भारत की आजादी के बाद जब पुर्तगालियों को गोवा को भारत को सौंपने को कहा गया था, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। लेकिन भारत ने ऑपरेशन विजय के माध्यम से 19 दिसंबर, 1961 को गोवा को मुक्त करा लिया गया और इसे दमन तथा दीव के साथ मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। 

भौगोलिक स्थिति एवं पौराणिक इतिहास गोवा भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसके उत्तर में तेरेखोल नदी बहती है, जो गोवा को महाराष्ट्र से अलग करती है। इसके दक्षिण में कर्नाटक का उत्तर कन्नड़ जिला और पूर्व में पश्चिमी घाट तथा पश्चिम में अरब सागर है। पणजी, मडगांव, वास्को, मापुसा, तथा पोंडा राज्य के प्रमुख शहर हैं। राज्य में 1,424 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में घने वन हैं। गोवा का उल्लेख भारतीय संस्कृति के कई पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। महाभारत के समय दक्षिण कोंकण क्षेत्र में गोवा को गोपराष्ट्र अर्थात गाय चराने वालों के देश के रूप में वर्णित है। कई अन्य संस्कृत श्लोक और धार्मिक ग्रंथों में इसे गोमांचल, गोपकपट्टम, गोपकेपुरी, गोवापुरी, गोवाराष्ट्र और गोमांतक आदि कई नामों से उल्लेखित किया गया है।  

गोवा का राजनीतिक इतिहास गोवा के प्रारंभिक राजनीतिक इतिहास को देखा जाए तो यह सातवाहन साम्राज्य का अंग रहा है। उसके बाद कदंब, मलखेड़ के राष्ट्रकूटों, चालुक्य तथा सिलाहार राजवंशों का राज रहा। 14वीं शताब्दी के अंत में यादवों का साम्राज्य समाप्त हुआ और दिल्ली के खिलजी वंश ने यहां शासन किया। नो इंडिया डॉट ओआरजी के मुताबिक, भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज करते हुए 1498 में वास्कोडिगामा और उसके बाद कई पुर्तगाली यात्री भारत पहुंचे थे। 1510 में अल्फांसो द अलबुकर्क ने विजयनगर के सम्राट की मदद से गोवा पर आक्रमण करके इसे कब्जा लिया। 

गोवा की मुक्ति और स्थापना दिवस 15 अगस्त, 1948 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद भी गोवा पुर्तगालियों के कब्जे में रहा। किंतु, पुर्तगाली शासक गोवा वासियों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहे थे। भारत सरकार के कई बार आग्रह के बावजूद जब पुर्तगाली नहीं माने तो फिर ऑपरेशन विजय की शुरुआत की गई। अंतत: 19 दिसंबर, 1961 को गोवा को मुक्त करा लिया गया और इसे दमण तथा दीव के साथ मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। हालांकि, बाद में 30 मई, 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया और दमण तथा दीव को अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। तब से ही 30 मई का दिन गोवा का मुक्ति दिवस यानी स्थापना दिवस के तौर पर मनाया जाता है।  स्थापना के बाद पणजी को गोवा की राजधानी तथा कोंकणी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया। 

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गोवा के बारे में प्रमुख जानकारियां 

गोवा की मुख्य खाद्य फसल चावल है। इसके अलावा दालें, रागी तथा कुछ अन्य खाद्य फसलें भी उगाई जाती हैं। 

गोवा में नारियल, काजू, सुपारी तथा गन्ने जैसी फसलों के साथ-साथ यहां अनन्नास, आम और केला भी होता है। 

गोवा के सभी गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है और शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है।

गोवा में लघु उद्योगों की संख्या 7,110 है और 20 औद्योगिक परिसर हैं। राज्य के खनिज उत्पादों में फैरो मैंगनीज, बॉक्साइट, लौह-अयस्क आदि शामिल हैं।

राज्य में मत्स्यकी का एक प्रमुख स्थान है, क्योंकि 90 प्रतिशत जनसंख्या यानी लगभग एक लाख लोग मत्स्य उद्योग में कार्यरत हैं। 

गोवा की सात प्रमुख नदियां जुआरी, मंडोवी, तेरेखोल, चापोरा, गलगीबाग, कुम्बरजुआ नहर, तलपोना और साल हैं।

गोवा में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 264 किलोमीटर तथा प्रांतीय राजमार्गों की लंबाई 279.4 किलोमीटर है। 

गोवा के पर्यटन स्थल 

कोलवा, कालनगुटे, वागाटोर, बागा, हरमल, अंजुना और मीरामार समुद्र तट गोवा के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं। 

पुराने गोवा में बैसीलिका ऑफ बोम जीसस और से-केथेड्रल चर्च; कावलेम, मारडोल, मंगेशी तथा बनडोरा मंदिर भी प्रमुख स्थल हैं। 

अगुडा, तेरेखोल, चपोरा और काबो डि रामा किले; प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध दूधसागर और हरवालेम जलप्रपात तथा माएम झील हैं। 

गोवा में समृद्ध वन्यप्राणी उद्यान हैं, जैसे- बोंडला, कोटीगाव तथा मोलेम वन्यप्राणी उद्यान, भगवान महावीर अभयारण्य और चोराव में डॉ. सलीम अली पक्षी उद्यान, जिसका कुल क्षेत्रफल 354 वर्ग किलोमीटर है। 

गोवा का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर है और यहां की जनसंख्या लगभग 15 लाख है। 

गोवा कैसे पहुंचे

सड़क मार्ग के अतिरिक्त गोवा कोंकण रेलवे के माध्यम से मुंबई, मंगलौर और तिरूवनंतपुरम से जुड़ा है। 

इस रेलमार्ग पर अनेक तेज-रफ्तार रेलगाड़ियां संचालित हैं, जो भारत के कई प्रमुख शहरों से जोड़ती हैं।

हवाई यात्रियों के लिए मुंबई, दिल्ली, तिरूवनंतपुरम, कोच्चि, चेन्नई, अगाती और बेंगलुरु से गोवा के डबोलिम हवाई अड्डे के लिए नियमित विमान सेवाएं हैं।  

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