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कांगड़ा: लापता पायलट का शव तो मिला, लेकिन केवल ढांचा; बाकी सब सड़ गया

कांगड़ा: लापता पायलट का शव तो मिला, लेकिन केवल ढांचा; बाकी सब सड़ गया

कांगड़ा: लापता पायलट का शव आखिरकार मिल गया है। प्रशासन की टीम जब शव के पास पहुंची तो सिर्फ हड्डियों का ढाचा मिला। ऊपर फोटो को गौर से देखिए.. जूता उसी एंगल में रखा हुआ है, जैसे पायलट गिरा था। महीनों तक बर्फ में शव दबा रहा और बर्फ हटने के बाद सड़कर सिर्फ हड्डियाँ बची हैं।

शव लाने गए थे सात लोग: पायलट रोहित भदोरिया (48 वर्ष) के शव रविवार को बैजनाथ पहुंचा। अब सोमवार को टांडा मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम होगा। रोहित के भाई अरविंदम और दोस्त विक्रम ने शव की शिनाख्त की है। शव गल-सड़ गया है। अस्थि पिंजर के रूप में इसे बोरी में डालकर लाया गया है। शव के पास पायलट का पैराग्लाइडर व कुछ अन्य सामान मिला है।

दो पुलिस जवान पवन और गुरवचन तथा बीड़ के पांच युवक घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे। शनिवार को मौसम के अनुकूल न होने पर किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो सका था। रविवार दोपहर को इस टीम ने शव को बैजनाथ पहुंचाया।

बर्फ पिघलने के बाद स्थानीय लोगों ने दी सूचना: बता दें कि रोहित पिछले कुछ वर्षों से अपने बेटे व पत्नी के साथ बीड़ में रह रहे थे। मूल रूप से वह दिल्ली के रोहिणी के रहने वाले थे। समय-समय पर बिलिंग से उड़ान भरते थे। आठ जनवरी को दोपहर बाद बिलिंग घाटी से उड़ान भरने के बाद रोहित का कुछ पता नहीं चला था।

परिजनों व प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से एक सप्ताह तक तलाश जारी रखी थी। अप्रैल में उत्तराला गांव के ऊपर जालसू जोत मैं कुछ लोगों को पायलट का सामान मिला था। जालसू जोत पर बर्फ पिघलने के बाद गत 28 मई को उतराला के लोक बहादुर ने बीड़ में जालसू जीत की पहाड़ियों में पायलट का शव के होने की सूचना दी।

अब तक हुई 10 विदेशी पायलटों की मौत: गौरतलब है कि बिलिंग घाटी में आज तक 10 विदेशी पायलट मौत का शिकार हो चुके हैं। एक ब्रिटिश पायलट जेओल किचन का शव आज तक नहीं मिला है। बिलिंग से पायलट के साथ टेंडम उड़ान भरने वाले चंडीगढ़ के एक व्यक्ति की बीड़ के समीप पत्थर में गिरने से मौत हो चुकी है।

दो वर्ष पूर्व छोटा भंगाल के 24 वर्षीय पायलट फ्री फ्लायर के तौर पर उड़ान भरने के बाद मौत का ग्रास बन चुके हैं। हालांकि, यह साहसिक खेल घाटी में 80 के दशक में शुरू हो गया था, लेकिन पायलटों की मौतों का सिलसिला 2003 के बाद शुरू हुआ है।

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