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आखिर क्यों नहीं लेती थीं महिलाएं अपने पति का नाम,वजह जान कर हैरान रह जायेंगे आप

आखिर क्यों नहीं लेती थीं महिलाएं अपने पति का नाम,वजह जान कर हैरान रह जायेंगे आप

अगर देखा जाये तो आजकल का ज़माना बहुत आगे जा चूका है और कोई भी इन फालतू की बातों पर विश्वाश नही करता| आजकल की 21 वि सदी में लड़कियाँ अपने पति को उनके नाम से ही बुलाती हैं और आजकल जो लव मैरेज का प्रचालन चला है उसमे तो ज़माना और भी ज्यादा आगे बढ़ गया है और शर्म की तो कोई जगह ही नही है अब| आजकल की लडकिय अपने आप को पुरुषो से बहुत आगे समझती है और इसमें कोई संदेह नही है की आज की लडकिय वाकई में हर फ़ील्ड में आगे है| और पुरुषो की तुलना में ज्यादा अधिक काम भी करती है| घर सर लेकर बहार तक का काम अकेले ही देख लेती है|

लेकिन ज़मान चाहे कितना भी आगे चला जाये रीती रिवाज़ तो हमेशा वही रहेंगे| आज के ज़माने में भी कुछ असी महिलाये हैं जो की पुराने परम्पराओ का पालन करती है| लेकिन क्या आप ने कभी सोचा है की पुराने ज़माने में आखिर महिलाये अपने पति का नाम लेकर क्यों नही बुलाती थी आखिर इसका क्या कारण है आज हम आपको इसी के बारे में कुछ बातें बताने वाले हैं| 

दोस्तों हमारे शास्त्रों में अनेक बातें कही गयी है और इसक अनुसार दखा जाये तो पति को परमेश्वर का दर्जा दिया जाता है यानि स्वामी या यूं कहें भगवन जैसा यानि जिसकी हर आगया हर इच्छा पूरा करना पत्नी का फ़र्ज़ होता है| और इतने पुज्निये का नाम नहीं लेते इसके पीछे कई कारन हैं| एक तो जैसा की हम जानते हैं की प्रार्थना से सामान्य मानव भी देवतुल्य हो जाता है तो ऐसा होता है की स्त्री जो खुद एक शक्ति का प्रतिक होती है जब अपने कर्म वचन और धर्म से अपने पति को पुजती है तो वो आम आदमी में कुछ दिव्या शक्ति आ जाती है|

हमारे शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है की ऐसा आदमी जिसकी पत्नी उसकी पूजा करती हो वो चिता पर से भी एक बार उठ कर वापस आ जाता है और कभी भी अकाल मृतु को प्राप्त नहीं कर सकता | वो जीता है और महान काम करता है |सामान्य आदमी भी पतिव्रता पत्नी के मिलते महान काम करने लग जाते हैं और घर बार से लेकर हर तरह के ऐश आराम खुद बा खुद उनके क़दमों में आने लग जाती है| पति-पत्नी में आपस के प्रेम की डोर पत्नी के हाथ में होती है और वही असल स्वामिनी होती है और लक्ष्मी का रूप भी | अगर वो चाहे तो घर को स्वर्ग बना दे और व्ही चाहे तो उसका सर्वनास कर डाले|

हमारे यहाँ वैदिक और भारतीय परम्परा में ऐसी कथाओं की बहुतायत है |महिर्षि चाव्यां बूढ़े थे पर उनकी पत्नी के रूप में आई राजकुमारी ने उन्हें नया रूप और यौवन दिया|अंधे कोढ़ी से भी रुप्वातियों की शादी हुई है और उन्ही का मान सम्मान कर उनकी पत्नियों ने उनको क्या से क्या बना दिया और खुद भी पूज्य हो गयी| पति-पत्नी में आपस के प्रेम की डोर पत्नी के हाथ में है वही असल स्वामिनी होती है और लक्ष्मी का रूप भी |अगर वो चाहे तो घर को बना दे या उसका सर्वनास कर डाले|हमारे यहाँ वैदिक और भारतीय परम्परा में ऐसी कथाओं की बहुतायत है |

पति का नाम लेकर बुलाने से या उनको तंग या परेसान करने से सौभाग्य रूठ जाता है| आखिर सीता जी के एक छोटे हठ ने उनको हमेशा के लिए अपने पति से दूर कर दिया , और मानव रूप में खुद लक्ष्मी ने सारे सांसारिक दुःख भोगे| पर यहाँ हम ये भी देखते हैं की राम जी की असल ताकत माता सीता की स्तुति थी जो वो नित रामचंद्र के स्मरण और धयान से उनको अर्पित करती थी| पति का नाम हमेशा नहीं लेना चाहिए अगर लेना भी पड़े तो शर्धा के साथ और श्री लगाकर ही अपने श्रीमुख से लेना चाहिए|

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