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हिमाचलः आंखों के सामने मलबे में समा गए बहू और पोता, कुदरत के इस कहर ने मुझे मौका तक नहीं दिया

हिमाचलः आंखों के सामने मलबे में समा गए बहू और पोता, कुदरत के इस कहर ने मुझे मौका तक नहीं दिया

मणिकर्ण घाटी के ब्रह्मगंगा नाले में दादा के सामने बहू और पोता बह गए। मिली जानकारी के अनुसार रोशन लाल के सामने चार साल का पोता निकुंज और उनकी बहू बाढ़ के सैलाब में बह गए। दादा ने बहू और पोते को बचाने के लिए हाथ भी दिया था, लेकिन हाथ पकड़ने से पहले तेज बहाव में समा गए। मणिकर्ण निवासी रोशन लाल द्वारा बताया गया कि बाढ़ आ गई है तो उन्होंने घर से निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर भागने की कोशिश की।

उनकी बहू पूनम अपने 4 वर्षीय बेटे को पीठ पर उठाकर भागने की कोशिश कर रही थी कि ऊपर से भारी मलबा और लकड़ी आ गई और पलक झपकते ही बहू और पोता निकुंज मलबे में खो गए, लेकिन मैं कुछ नहीं कर पाया। रोशन लाल ने बताया कि यह मेरा दुर्भाग्य रहा कि मैं उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर पाया और कुदरत के इस कहर ने मुझे मौका तक नहीं दिया।

सुबह करीब छह बजे आई बाढ़ के समय ब्रह्मगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट में तैनात तकनीशियन अमित ने सीटियां बजाकर सो रहे लोगों को अलर्ट किया। इससे कई लोगों की जान बच गई। अमित की ड्यूटी सुबह सात बजे तक थी।

प्रोजेक्ट में तैनात प्रत्यक्षदर्शी तकनीशियन अमित ने कहा कि वह ब्रह्मगंगा नाले का रौद्र रूप देखकर हैरान थे। जब नाले का जलस्तर बढ़ा तो मात्र दस मिनट में सब कुछ तबाह हो गया। उन्होंने कहा कि सुबह के समय लोग अपने घरों में सोये थे। उन्होंने सीटी बजाने के साथ शोर मचाया। इससे लोग घर से सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। प्रोजेक्ट के मैनेजर सुरेश ने बताया कि प्रोजेक्ट में तैनात कर्मचारी ने सीटियां बजाकर लोगों को अलर्ट किया था।

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