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गांधी जी ने क्‍यों नहीं सुना नेहरू का ऐतिहासिक ‘Tryst With Destiny’ स्‍पीच, 15 अगस्‍त के रोचक तथ्‍य

गांधी जी ने क्‍यों नहीं सुना नेहरू का ऐतिहासिक ‘Tryst With Destiny’ स्‍पीच

देश अपना 75वां स्‍वतंत्रता दिवस मना रहा है जो कि हर एक भारतवासी के लिए गर्व और सम्‍मान का दिन है। 74 वर्ष पहले तक देश ब्रिटेन का गुलाम था जिससे आजादी पाने के लिए हमें वर्षों की लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। गांधी जी ने इस जंग में देशवासियों की अगुवाई की और आखिरकार 15 अगस्‍त 1947 को अंग्रेजों को देश छोड़कर जाना ही पड़ा। हालांकि, गांधी जी खुद आजादी के जश्‍न में शामिल नहीं हो सके क्‍योंकि उस समय वे बंगाल में चल रही हिंदू मुसलमान साम्‍प्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन पर थे। आखिरकार कैसा रहा होगा वो दिन, जब दशकों की गुलामी के बाद देश ने आजादी की सांस ली होगी। आइये जानते हैं 15 अगस्‍त ये जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्‍य।

– जब 14 अगस्‍त की मध्‍यरात्रि में पंडित जवाहरलाल नेहरु ने अपना ऐतिहासिक ‘Tryst With Destiny’ भाषण दिया था, तब गांधीजी बंगाल में थे और जल्‍दी सो जाने की वजह से वे यह भाषण सुन नहीं सके।

– 15 अगस्‍त 1947 को प्रधानमंत्री ने लाल किले झंडा नहीं फहराया था बल्कि अगले दिन 16 अगस्‍त को फहराया था। इसके बाद से हर साल 15 अगस्‍त के दिन ही प्रधानमंत्री लाल किले से देश के नाम अपना संबोधन करते हैं।
– 15 अगस्‍त को देश आजाद हो गया मगर उस समय देश का कोई राष्‍ट्रगान नहीं था। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1911 में लिखा हुआ ‘जन गण मन’ 1950 में जाकर भारत का राष्‍ट्रगान बना।
– 15 अगस्‍त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने दोपहर के समय लार्ड माउंटबेटन को अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी जिसके बाद देश ने आजादी की सांस ली।
– 15 अगस्‍त 1947 को 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था।
– 15 अगस्‍त को भारत के अलावा कोरिया, बहरीन, लिंकटेंस्‍टीन और कांगो का भी स्‍वतंत्रता दिवस होता है।

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