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आज है कजरी तीज, ये है व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आज है कजरी तीज, ये है व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कजरी तीज का त्योहार आज है। हरतालिका तीज के बाद अब महिलाओं को कजरी तीज का इंतजार रहा है। हिंदी पंचांग के मुताबिक कजरी तीज का पर्व हर साल भाद्रमास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। ऐसे में देशभर में आज कजरी तीज का पर्व मनाया जा रहा है।

हरियाली तीज की तरह ही कजरी तीज का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं और लड़कियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। वहीं विवाह योग्य कुमारी कन्याएं सुयोग्य जीवन साथी के लिए इस व्रत को करती है। कजरी तीज व्रत का पारण चंद्रमा के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद किया जाता है।

इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती (Mata Pravati) की पूजा-अर्चना करती हैं। इससे माता पार्वती और भगवान शिव प्रसन्न होकर मनवांछित फल देते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

कजरी तीज की पूजा का शुभ मुहूर्त कजरी तीज का व्रत भादो महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। हिंदी पंचांग के मुताबिक भादों के कृष्ण की तृतीया तिथि कल यानी 24 अगस्त की शाम 4:05 बजे से शुरू हो कर आज शाम शाम 04 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। ऐसे में महिलाएं कजरी तीज का व्रत आज रख रही हैं।

कजरी तीज पर बन रहा है धृति योग कजरी तीज इस बार खास धृति योग बन रहा है। आज सुबह 05 बजकर 57 मिनट तक धृति योग रहेगा। इस योग में किया गया सभी शुभ कार्य सफल एवं शुभ फलदायी होते हैं ऐसी मान्‍यता है। वैदिक शास्त्र के अनुसार, धृति योग को बेहद शुभ भी माना गया है।

कजरी तीज का पूजा विधि कजरी तीज के दिन नीमड़ी माता का पूजन किया जाता है। नीमड़ी माता को माता पार्वती का ही रूप माना जाता है। कजरी तीज के दिन सुबह स्नान आदि करके साफ कपड़ा पहने लें। उसके बाद घर के पूजा स्थल पर व्रत करने और पूजा करने का संकल्प लें। अब नीमड़ी माता की पूजा में भोग लगाने के लिए माल पुआ बनाएं। पूजन के लिए मिट्टी या गाय के गोबर से तालाब बनाएं। उसमें नीम की टहनी डाल कर उस पर लाल चुनरी रखकर नीमड़ी माता की स्थापन करें।

अब निर्जला व्रत रखते हुए 16 श्रृंगार कर माता का पूजन करें। नीमड़ी माता को हल्दी, मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, लाल चुनरी, सत्तू और माल पुआ चढ़ाएं। चंद्रमा का दर्शन करें और उन्हें अर्घ्य दें। इसके पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण करें। मान्यता के मां की आशीर्वाद से अखण्ड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

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