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हिमाचल: यात्रियों से भरी बस पर चट्टानें गिरने से मरने वालों का आंकड़ा 13 पहुंचा, 40 से ज्यादा लापता

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में 16 दिन बाद एक बार फिर लोगों पर मौत का पहाड़ टूटा है। बुधवार सुबह करीब 11:56 बजे भावानगर से 10 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास यात्रियों से भरी एचआरटीसी बस (एचपी25ए-3048), टिपर, दो कारों, सूमो और अखबार की गाड़ी पर चट्टानें गिर गईं, जिसमें कुल मिलाकर 13 लोगों की मौत हो गई है। 40 से ज्यादा लोगों के लापता होने की आशंका है जबकि 14 घायलों को मलबे से निकाल लिया गया है। गुरुवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज हो गया है।  एनएच के करीब 100 मीटर हिस्से पर टनों के हिसाब से मलबा और चट्टानें गिर गईं। रात 9:00 बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में मलबे को हटाकर टिपर, दो कारों और एक सूमो को निकाल लिया गया है। हालांकि, टीमें अभी बस को नहीं खोज पाई हैं। दिन में ड्रोन की मदद से भी बस को खोजा गया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। रात को एनएच से करीब 400 मीटर नीचे उतरकर टीमें सतलुज नदी के पास भी पहुंचीं पर बस का कोई  सुराग नहीं मिला। सेना, आईटीबीपी की तीन बटालियनों के 200 जवान, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने  सुबह दोबारा रेस्क्यू शुरू करे दिया है।    बस के ड्राइवर-कंडक्टर समेत 13 घायलों को एंबुलेंस से सीएचसी भावानगर पहुंचाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। दिन में राहत-बचाव कार्य तेजी से चलता रहा लेकिन पहाड़ से पत्थर गिरने से रेस्क्यू अभियान में परेशानी आती रही। बारिश ने भी बचाव कार्य में बाधा डाली। बताया जा रहा है कि बस मूरंग से रिकांगपिओ पहुंची, जहां सवारियां बैठाने के बाद हरिद्वार के लिए रवाना हुई थी। बस में करीब 22 सवारियां बैठी थीं। अभी तक चार पुरुषों, पांच महिलाओं और एक बच्ची का शव बरामद किया गया है। एक शव बाद में भी मिला। सभी मृतक हिमाचल के निवासी थे।   Download Amar Ujala App for Breaking News in Hindi & Live Updates. https://www.amarujala.com/channels/downloads?tm_source=text_share

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में 16 दिन बाद एक बार फिर लोगों पर मौत का पहाड़ टूटा है। बुधवार सुबह करीब 11:56 बजे भावानगर से 10 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास यात्रियों से भरी एचआरटीसी बस (एचपी25ए-3048), टिपर, दो कारों, सूमो और अखबार की गाड़ी पर चट्टानें गिर गईं, जिसमें कुल मिलाकर 13 लोगों की मौत हो गई है। 40 से ज्यादा लोगों के लापता होने की आशंका है जबकि 14 घायलों को मलबे से निकाल लिया गया है। गुरुवार सुबह फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज हो गया है।

एनएच के करीब 100 मीटर हिस्से पर टनों के हिसाब से मलबा और चट्टानें गिर गईं। रात 9:00 बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में मलबे को हटाकर टिपर, दो कारों और एक सूमो को निकाल लिया गया है। हालांकि, टीमें अभी बस को नहीं खोज पाई हैं। दिन में ड्रोन की मदद से भी बस को खोजा गया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। रात को एनएच से करीब 400 मीटर नीचे उतरकर टीमें सतलुज नदी के पास भी पहुंचीं पर बस का कोई सुराग नहीं मिला। सेना, आईटीबीपी की तीन बटालियनों के 200 जवान, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने सुबह दोबारा रेस्क्यू शुरू करे दिया है।

बस के ड्राइवर-कंडक्टर समेत 13 घायलों को एंबुलेंस से सीएचसी भावानगर पहुंचाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। दिन में राहत-बचाव कार्य तेजी से चलता रहा लेकिन पहाड़ से पत्थर गिरने से रेस्क्यू अभियान में परेशानी आती रही। बारिश ने भी बचाव कार्य में बाधा डाली। बताया जा रहा है कि बस मूरंग से रिकांगपिओ पहुंची, जहां सवारियां बैठाने के बाद हरिद्वार के लिए रवाना हुई थी। बस में करीब 22 सवारियां बैठी थीं। अभी तक चार पुरुषों, पांच महिलाओं और एक बच्ची का शव बरामद किया गया है। एक शव बाद में भी मिला। सभी मृतक हिमाचल के निवासी थे।

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