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अब पंचायत भवन में पति हो बैठाया तो जाएगी प्रधानी

अब पंचायत भवन में पति हो बैठाया तो जाएगी प्रधानी

ग्राम प्रधान यदि महिला हैं तो अधिकांश मौके पर उनके पति ही सत्ता संभाल लेते हैं। यहां तक कि पंचायत भवन में भी बैठक करने पति या देवर पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में पंचायतीराज एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। पंचायत भवन सहित अन्य सभी बैठकों, आयोजनों में प्रधान को ही हिस्सेदारी लेनी होगी। ऐसा न मिलने की दशा में महिला प्रधान की प्रधानी भी जा सकती है।

इस बार जिले की 272 ग्राम पंचायतों में प्रधानी की सीट पर 122 महिलाओं की कब्जेदारी है। इसमें काफी संख्या में तो महिला प्रधान काफी जागरूक हैं और गांव की सरकार संचालित करने में सक्षम भी रही हैं। वहां तो कोई परेशानी नहीं आ रही लेकिन कुछ पंचायतों में आज भी ऐसी महिला प्रधान हैं जो केवल नाम के लिए हैं। वहां की पंचायत में होने वाले कार्य से लेकर, खाता संचालन, पंचायत की बैठक, जिला मुख्यालय के आयोजन तक में उनके पति, देवर, ससुर हिस्सेदारी लेते हैं। अब ऐसी महिला प्रधानों पर सख्त कार्रवाई होगी।

जारी आदेश पंचायतीराज अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि पंचायत में हर बैठक में प्रधान को ही भाग लेना है। महिला प्रधान होने पर वहां उनके पति, देवर या अन्य कोई हिस्सा लेते पाए जाने पर पंचायतीराज एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी। प्रधानी तक भी छिन सकती है। रजिस्टर में दर्ज होगी कार्रवाई

बैठक के दौरान क्या शिकायतें आईं, क्या कार्यवाही हुई इसका डिटेल दिया जाएगा। पंचायत भवन में रखे रजिस्टर में सभी के हस्ताक्षर होंगे। सभी विभागों के एक-एक कर्मचारी की भी क्रमवार वहां उपस्थिती दर्ज होगी। पंचायत भवन की दीवार पर प्रत्येक विभाग के कर्मचारी का फोन नंबर अंकित होगा।

गांव में बनी गोशाला की देखरेख की जिम्मेदारी प्रधान की है, सामुदायिक इज्ज्तघर, पंचायत भवन सचिवालय संचालित करने, आने वाली समस्याओं का निराकरण होगा। बैठक में प्रधान को ही हिस्सेदारी लेनी होगी, महिला प्रधान होने पर उनके स्थान पर घर का कोई दूसरा सदस्य बैठक में भाग लेने का अधिकार नहीं रखता है।

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