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सावधान! बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है ऑनलाइन क्लास, शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी पड़ रहा है बुरा असर News Himachali

सावधान! बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है ऑनलाइन क्लास, शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी पड़ रहा है बुरा असर

कोरोनावायरस ने इस दुनिया को ऐसे-ऐसे हालात दिखाए, जिसकी किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी. दुनियाभर के करोड़ों लोग ने अपने जीवन में पहली बार लॉकडाउन का सामना किया, वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था को देखा और छात्रों ने ऑनलाइन क्लासेज जैसी व्यवस्था देखी. भारत में बीते साल से ही ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं. कोरोना वायरस की पहली लहर के बाद देश के कई राज्यों में स्कूल खुले ही थे कि दूसरी लहर को देखते हुए दोबारा स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए. हालांकि, अब एक बार फिर कुछ राज्यों में स्कूल खोले जा रहे हैं. ऑनलाइन क्लास के दौरान जहां एक तरफ बच्चों को शिक्षा का नया अनुभव मिला वहीं दूसरी ओर इसकी वजह से बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में कई दिक्कतें भी देखने को मिली.

दो साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल से दूर रखना बहुत जरूरी

ऑनलाइन क्लासेज बच्चों के लिए कितनी फायदेमंद है और कितनी नुकसानदेह है? और अगर नुकसानदेह है तो ये बच्चों को किस तरह से प्रभावित कर रही है. इस बड़े मुद्दे को समझने और परखने के लिए टीवी9 ने देश के दो बड़े डॉक्टरों के साथ खास बातचीत की. इस सिलसिले में पारस हॉस्पिटल के डॉ. (मेजर) मनीष मनन और डिवाइन माइंड क्लीनिक की डॉ. रूही सतीजा ने बच्चों पर पड़ने वाले ऑनलाइन क्लासेज के प्रभाव को लेकर अहम जानकारी दी. डॉ. मनीष मनन ने कहा कि मोबाइल फोन के सामने घंटों बैठे रहना बच्चों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है. डॉ. मनन के बताया कि अमेरिकन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स के मुताबिक 2 साल और इससे कम उम्र के बच्चों को तो मोबाइल फोन की स्क्रीन से पूरी तरह दूर ही रखना चाहिए. वहीं, 2 से 4 साल तक के बच्चे ज्यादा से ज्यादा एक घंटे ही मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठ सकते हैं और वो भी अपने माता या पिता की मौजूदगी में.
ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है बुरा असर

डॉ. मनन ने ऑनलाइन क्लासेज को लेकर हुई एक स्टडी का जिक्र किया और बताया कि स्टडी में शामिल हुए करीब 58 फीसदी बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हुईं. 18 फीसदी अभिभावकों ने अनुभव किया कि उनके बच्चे अब आक्रामक या गुस्सैल हो गए हैं. ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चों में कई तरह की शारीरिक समस्याएं जैसे- शारीरिक तनाव, आंखों का तनाव, कमर दर्द, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, मोटापा, तनाव, नींद न आना आदि का सामना करना पड़ रहा है. डॉक्टर मनन ने कहा कि यदि किसी बच्चे का स्क्रीन टाइम हफ्ते में एक घंटा भी बढ़ा दिया जाए तो उनमें मोटापे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. इन सभी दिक्कतों को देखते हुए छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेज बिल्कुल भी सही नहीं है. ये कहना बिल्कुल गलत होगा कि ऑनलाइन क्लासेज छोटे बच्चों के लिए सही है.


बच्चों के मानसिक विकास के लिए भी सही नहीं है ऑनलाइन क्लास

ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चों को होने वाली मानसिक समस्याओं के बारे में डॉ. रूही सतीजा ने डॉ. मनीष की बातों का पूरा समर्थन किया. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चों में तनाव और चिंता की समस्याएं बढ़ रही हैं. स्कूल की कक्षाओं में बच्चे अपने साथियों के साथ बैठकर मन लगाकर पढ़ाई करते थे लेकिन ऑनलाइन कक्षाओं में ऐसा नहीं हो रहा है. ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चे समाज से भी अलग हो गए हैं और इतनी छोटी उम्र में ऐसा होना किसी भी हाल में सही नहीं है. इससे उनके मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ रहा है. डॉ. रूही की मानें तो ऑनलाइन क्लास की वजह से बच्चे डिमोटिवेट हो रहे हैं. इतना ही नहीं, इसी वजह से बच्चे इनडिसीप्लीन भी होते जा रहे हैं.

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