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हिमाचल: M.Phil में टॉप करने वाली गरीब पिता की बेटी सेंट बीड्स कॉलेज में बनी सहायक प्रोफेसर

हिमाचल: M.Phil में टॉप करने वाली गरीब पिता की बेटी सेंट बीड्स कॉलेज में बनी सहायक प्रोफेसर

चंद माह पहले हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हिंदी विषय में टॉप करने वाली अंजना देवी अब देश के नामी कॉलेज सेंट बीड्स (St. Bede’s College) कॉलेज शिमला में हिंदी पढ़ाने लगी है। शुक्रवार को अंजना ने हिंदी विषय के सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यभार संभाल लिया है। हाल ही में अंजना देवी का इस पद पर चयन हुआ था।

आप जानकर हैरान होंगे कि पांच बेटियों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए माता -पिता ने मजदूरी के लिए घर छोड़ दिया था, क्योंकि घर पर खेती की मामूली आमदनी से ये संभव नहीं था।

पांवटा साहिब के औद्योगिक क्षेत्र गोंदपुर में दंपति पांच बेटियों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए दिन-रात मेहनत करता रहा है। पिता कंठी राम व माता विजरा देवी एक निजी कंपनी में मजदूरी करने लगे,ताकि बेटियों के उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना अधूरा न रह जाए। माता-पिता की कोशिश अब रंग ले आई है।

कुछ समय पहले कांटी मशवा पंचायत के मशवा गांव की रहने वाली 25 वर्षीय अंजना देवी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में हिन्दी एमफिल की परीक्षा में टाॅप किया था। अब आगे पीएचडी भी करना चाहती है। सबसे बड़ी बेटी की इस कामयाबी पर माता-पिता गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। अंजना की छोटी बहन भी काबिल है। बीएससी करने के बाद बीएड कर रही है,जबकि एक गैजुएशन (Graduation) की पढ़ाई पांवटा साहिब डिग्री काॅलेज से कर रही है।

चौथे नंबर की बहन जमा दो की शिक्षा ग्रहण कर रही है तो सबसे छोटी आठवीं कक्षा में पढ़ कर रही है। यूजीसी (UGC) की नेट परीक्षा तीन बार उत्तीर्ण कर चुकी है, मगर तब तक अंजना कोशिश जारी रखेगी, जब तक जेआरएफ (JRF) न हो जाए। बता दें कि अंजना के तीन शोध पत्र (Research Papers) भी राष्ट्रीय जरनल (National Journal) में प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें से दो राजभाषा से जुड़े हैं, जबकि एक नारी विमर्श विषय पर है। मार्गदर्शक डॉ. भवानी सिंह के नेतृत्व में अंजना देवी ने हिमाचल सचिवालय में राजभाषा हिन्दी का कार्यान्वयन विषय पर शोधपत्र भी लिखा है। इसमें अंजना ने पाया था कि सरकारी क्रियाकलापों में हिन्दी पराई हो जाती है।

इसी बीच नियुक्ति से खुश अंजना ने एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क से बातचीत में सफलता का श्रेय माता -पिता के इलावा गुरुजनो को दिया है। उन्होंने कहा कि वो चाहती है कि छोटी बहनो की शिक्षा में आर्थिक संकट चुनौती न बने।

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