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हिमाचल में 70 दिनों में 302 लोगों की मौत, 800 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान

हिमाचल में 70 दिनों में 302 लोगों की मौत, 800 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का कहर जारी है. कई स्थानों में भारी बारिश हो रही है. राजधानी शिमला समेत कई जिलों में भूस्खलन के हादसे हर रोज हो रहे हैं. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 13 जून से 22 अगस्त के बीच प्रदेश में 302 लोगों की मौत हुई. 11 लोग अब भी लापता हैं. किन्नौर जिले में दो बार पहाड़ से मौत बरसी है. संपत्ति को भी खासा नुकसान हुआ है. अब तक के आकलन के अनुसार प्रदेश में करीब 800 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है. राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ओंकार चंद शर्मा ने इसकी पुष्टि की है.

आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान 578 मवेशियों की मौत हुई है. 44 पक्के और 91 कच्चे मकान जमींदोज हुए हैं. इनके अलावा 121 पक्के और 556 कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है. 302 में से 142 लोग सड़क पर हुए हादसों में मारे गए हैं. भूस्खलन से 51 और अचानक आई बाढ़ में 10 लोगों की मौत हुई है. 28 लोग ऐसे हैं जिनकी डूबने से मौत हुई है. भूस्खलन से हुई 51 मौतों में से अकेले किन्नौर जिले में अब तक 37 लोगों की मौत हुई है.

इस बरसात में सबसे ज्यादा तबाही किन्नौर, कांगड़ा, लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिले में देखने को मिली है. किन्नौर में हुए हादसे ने सबको हैरान और परेशान कर दिया है. इस तरह के हादसों को लेकर स्टेट बायोडाइवर्सिटी बोर्ड के सीनियर साइंटिफिक प्रोफेशनल डॉ. पंकज शर्मा का कहना है कि 2013 में भी किन्नौर में इसी तरह का हादसा हुआ था. उस वक्त भी वैज्ञानिकों की एक टीम ने वहां का दौरा किया था. 

उसमें भी यह पाया गया था कि टनल निर्माण और अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए की गई ब्लासटिंग से वहां के पहाड़ थोथले हो गए. उस क्षेत्र में बारिश बेहद कम होती थी, लेकिन बीते कुछ दशकों में पर्यावरण में बदलाव के चलते बारिश हो रही है. बारिश से इलाके के पहाड़ों की दरारों से पानी घुसता रहता है और थोथड़े पहाड़ों की मिट्टी ढीली होती रहती है. जिसके परिणाम स्वरूप इस तरह के हादसे होते हैं. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की तरह ही किन्नौर की वनस्पति है और जिस तरह से वहां पर आपदाएं होती हैं, उसी तरह से किन्नौर में भी हो रही हैं.

राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ओंकार चंद शर्मा का कहना है कि अब तक मॉनसून सामान्य चल रहा है. लेकिन कुल्लू और चंबा जिले के कई इलाकों में ज्यादा बारिश हुई है. प्रदेश के कुछ इलाकों में औसतन कम बारिश हुई है. अचानक तेज बारिश से ज्यादा नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जिनकी मृत्यु हुई है उन्हें मुआवजा दिया गया है.

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