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आज है सावन का लास्ट सोमवार, इस विशेष दिन की तिथि, समय, पूजा विधि और व्रत अनुष्ठान के बारे में जानें

आज है सावन का लास्ट सोमवार, इस विशेष दिन की तिथि, समय, पूजा विधि और व्रत अनुष्ठान के बारे में जानें

श्रावण हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना है. बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ श्रावण या सावन को हिंदुओं में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. इसकी शुरुआत अमावस्या के दिन से होती है. उत्तर भारत में, लोग पूर्णिमांत कैलेंडर का पालन करते हैं, जहां श्रावण थोड़ी देर से आता है, दक्षिण भारत में अमंत कैलेंडर का पालन किया जाता है जहां पंद्रह दिन पहले श्रावण शुरू होता है.

श्रावण के दौरान सूर्य अपनी ही राशि सिंह राशि में है. वैसे तो पूर्ण श्रावण मास बहुत ही शुभ होता है, लेकिन श्रावण सोमवार किसी भी अन्य दिन की तुलना में अधिक महत्व रखता है क्योंकि इसे भगवान शिव का दिन माना जाता है. महीने में चार श्रावण सोमवार होते हैं.

सावन सोमवार 2021 की तिथि

पहला सोमवार 26 जुलाई को और आखिरी सोमवार 16 अगस्त 2021 को पड़ेगा.

सावन सोमवार 2021 का समय

सूर्योदय- 06:37
सूर्यास्त- 17:43
चंद्र उदय- 11:52
चंद्र अस्त- 00:45
राहु काल- 08:00 – 09:23
अमृत ​​काल- कोई नहीं
अभिजीत मुहूर्त- 11:48 – 12:32

सावन सोमवार 2021 का महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार, श्रावण सोमवार के दौरान भक्तों को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. हिंदुओं का मानना ​​​​है कि देवी पार्वती ने श्रावण सोमवार व्रत को गहनता से मनाया था. अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए ये व्रत करती हैं. विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख और परिवार में सुख पाने के लिए इसका पालन करती हैं.

भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस व्रत का पालन करते हैं क्योंकि वो बहुत दयालु हैं और भक्तों को शांति समृद्धि और धन्य जीवन का आशीर्वाद देते हैं. भगवान शिव को प्रणाम करें और परंपरा और प्राचीन संस्कारों के साथ मंत्रों और अभिषेक के साथ पूजा करें, भगवान शिव बहुतायत सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद देंगे.

सावन सोमवार 2021: लीजेंड

सावन के महीने में देवताओं और राक्षसों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान, रत्नों और अमृत के अलावा, हलाहल (जहर) भी समुद्र से निकला था. हलाहल पृथ्वी पर जीवन को नष्ट कर सकता है, इसलिए ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान शिव ने पूरा हलाहल पी लिया, और उनकी गर्दन नीली हो गई. इसी के कारण वो नीलकंठ के नाम से विख्यात हुए. इसलिए, हलाहल के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए, श्रावण के दौरान भगवान शिव को गंगाजल का भोग लगाया जाता है.

सावन सोमवार 2021 का अनुष्ठान

– भक्त जल्दी उठते हैं, स्नान करते हैं और मंदिर जाते हैं.
– वो उपवास रखते हैं और सायं को केवल एक बार भोजन करते हैं.
– जल, दूध, दही, शहद, शक्कर, सुगंध आदि से अभिषेक किया जाता है.
– बिल्व पत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं.
– घर में भक्त देवी पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं.
– शिव मंत्रों का जाप किया जाता है. महामृत्युंजय जप भी किया जाता है.
– गायों, मछलियों और पक्षियों को भोजन दिया जाता है.
– दान कार्य को बहुत शुभ माना जाता है.

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