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यहां जानें- गणेशजी का कब हुआ था जन्म और दोपहर में क्यों करते हैं गणेश पूजन?

गणेशजी का कब हुआ था जन्म और दोपहर में क्यों करते हैं गणेश पूजन

देशभर में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2021) की तैयारी जोरों पर है। देशभर में 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत शुक्रवार यानी से हो रही है। पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश का जन्म हुआ था। धर्म के जानकारों के मुताबिक, भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न में हुआ था। इसीलिए मध्याह्न के समय में गणेश पूजा को सबसे उपयुक्त माना गया है।

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है। कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा का 9 दिनों तक पूजन किया जाता है। बड़ी संख्या में आसपास के लोग दर्शन करने पहुंचते है। 9 दिन बाद गाजे बाजे से श्री गणेश प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है।

भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। जिसे देश भर में गणेश-चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। कई लोग एक दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिनों के लिये भी गणपति जी को घर पर लाते हैं।

पारंपरिक रूप से भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि को श्रद्धालु अपने-अपने घरों में गणपति बप्पा की प्रतिमा को स्थापित करके उनकी प्राण-प्रतिष्ठा सहित पूजा करते हैं। गणपति पूजन में बहुत से लोग 10 दिन के लिए घर में गणपति पूजन का आयोजन करते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन बड़ी धूम-धाम के साथ विदाई देकर उनका विसर्जन करते हैं। साथ ही कामना करते हैं कि उनके जीवन सब मंगलमय हो और अगले वर्ष फिर से हम आपकी पूजा कर पाएं।

गणेश चतुर्थी के दिन इस साल भद्रा का साया भी लग रहा है। गणेश चतुर्थी के दिन 11 बजकर 09 मिनट से रात 10 बजकर 59 मिनट तक पाताल निवासिनी भद्रा रहेगी। शास्त्रों के मुताबिक पाताल निवासिनी भद्रा का होना शुभ फलदायी होता है। इस समय धरती पर भद्रा का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है। दूसरी बात यह भी है कि गणपतिजी स्वयं सभी विघ्नों का नाश करने वाले विघ्नहर्ता हैं इसलिए गणेश चतुर्थी पर लगने वाले भद्रा से लाभ ही मिलेगा।

गणपति स्थापना पूजन का शुभ मुहूर्त (Ganesh Chaturthi Shubh Muhurat)

इस बार गणपति पूजन का शुभ मुहूर्त दिन में 12 बजकर 17 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में शुरू होगा और रात 10 बजे तक पूजन का शुभ समय रहेगा। पूजा के समय 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र (Ganesha Mantra Jaap) का जप करते हुए गणपतिजी को जल, फूल, अक्षत, चंदन और धूप-दीप एवं फल नैवेद्य अर्पित करें। प्रसाद के रूप में गणेशजी को उनके अति प्रिय मोदक का भोग जरूर लगाएं।

  • सुबह का मुहूर्त- 7:39 से लेकर दोपहर 12:14 तक
  • दिन का मुहूर्त- दोपहर 1:46 से लेकर 3:18 तक
  • शाम का मुहूर्त- शाम 6:21 से लेकर 10:46 तक
  • रात का मुहूर्त- रात 1:43 से लेकर 3:11 तक (20 सितंबर)
  • प्रातः काल मुहूर्त- सुबह 4:40 से लेकर 6:08 बजे तक (20 सितंबर)

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