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टेस्टी तो है तंदूरी रोटी, पर क्या ये आपकी सेहत के लिए भी अच्छी है? जानिए क्या है सच्चाई

टेस्टी तो है तंदूरी रोटी, पर क्या ये आपकी सेहत के लिए भी अच्छी है? जानिए क्या है सच्चाई

कढ़ाई पनीर हो या चिकन कोरमा, इन्हें खाने का मज़ा सिर्फ तंदूरी रोटी के साथ ही आता है। चाहें त्यौहार हो या शादियां, तंदूर में पक रही रोटियां सबका ध्यान आकर्षित कर लेती हैं और कोई भी इन्हें न नहीं कह पाता है। लेकिन सवाल है कि क्या ये आपकी सेहत के लिए भी उतनी अच्छी हैं जितनी स्वाद में होती।
 
तंदूर की रोटी में 110 से 150 कैलोरीज होती है, जिसमें से कार्बोहायड्रेट और कैलोरीज का सबसे ज्यादा प्रतिशत होता है। वहीं बता दे तंदूर रोटियां मैदा से बनाई जाती हैं मैदे के लगातार सेवन से कई बीमारियां हो जाती हैं। चलिए जानते हैं..

डायबिटीज का जोखिम मैदा का पहला सीधा प्रभाव यह है कि यह आपके शर्करा के स्तर को बढ़ाता है क्योंकि इसमें बहुत अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है। शुगर स्पाइक के साथ मेल खाने के लिए, अग्न्याशय को पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन जारी करने के लिए काम करना पड़ता है। यदि आप मैदा का बार-बार सेवन कर रही हैं, तो इंसुलिन का उत्पादन धीरे-धीरे कम हो जाएगा, जिसकी वजह से डायबिटीज हो सकती है।

बढ़ जाता है ह्रदय रोग का जोखिम ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन के अनुसार ठोस ईंधन जैसे कोयला, लकड़ी या चारकोल में लंबे समय तक पका हुआ खाना खाने से वायु प्रदूषण तो होता ही है, साथ ही हृदय रोग का जोखिम भी बढ़ता है।

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