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हिमाचल: बिजली बिलों ने उड़ाए लोगाें के होश, बोर्ड का नहीं मीटर रीडर का है दोष

हिमाचल: बिजली बिलों ने उड़ाए लोगाें के होश, बोर्ड का नहीं मीटर रीडर का है दोष

शहर में आ रहे बिजली के भारी भरकम बिलों से उपभोक्ता परेशान हो गए हैं। हैरानी की बात है कि बिजली बोर्ड के अधिकारी इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं और उपभोक्ताओं को पूरा बिल जमा करवाने को कह रहे हैं। शहर के बाईपास पर एक दुकान का बिल 1.05 लाख रुपए आया है। 

भारी भरकम बिल आने पर जब बिजली बोर्ड के अधिकारियों के समक्ष इस मामले को उठाया गया तो उन्होंने मीटर चैक करवाया कि कहीं मीटर की खराबी के कारण तो नहीं ज्यादा बिल आया है लेकिन जांच में मीटर सही पाया गया। उसके बाद बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि यह विद्युत बोर्ड की गलती नहीं है बल्कि मीटर रीडर की कथित लापरवाही के कारण भारी भरकम बिल आया है। संभावना व्यक्त की जा रही थी कि मीटर रीडर बिना रीडिंग के हर माह औसतन बिल काटता रहा और जब मीटर रीडिंग की तो वास्तविक बिल आ गया।

इस पूरे मामले में बोर्ड के अधिकारियों ने भी कोई मदद करने से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। बोर्ड का कहना था कि अब तो बिजली का पूरा बिल जमा करवाना होगा। उपभोक्ता किस्तों में अब इस बिल को जमा करे। यदि उपभोक्ता को पिछले लंबे समय से बिना मीटर रीडिंग के औसतन बिल ही दिया जा रहा था तो इसमें उपभोक्ता की क्या गलती है। यह बिजली का मीटर सुशील सहगल के नाम पर है। हालांकि वह बिल जमा करवाने में सक्षम हैं लेकिन यह बिल किसी गरीब आदमी का होता तो उसे इसका भुगतान करने के लिए कर्ज लेना पड़ता। बोर्ड को शहर में यह सुनिश्चित बनाना होगा कि उपभोक्ता को औसतन नहीं वास्तविक बिजली के बिल जारी हों। इसके लिए मीटर रीडर को फील्ड में जाकर मीटर की रीडिंग लेनी होगी।

वहीं दुकान संचालक हंसराज ठाकुर ने बताया कि मार्च महीने में उनकी दुकान का 3,213 रुपए, अप्रैल में 4,467, मई-जून में 3,976 रुपए व जुलाई में 10,226 रुपए बिल आया था। उधर, बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता विकास गुप्ता ने बताया कि बिजली बोर्ड ने इस मामले में मीटर चैक करवाया था, जो सही पाया गया। नियमों के मुताबिक उपभोक्ता को बिल का भुगतान करना ही पड़ेगा। मीटर रीडर की गलती पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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