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हिमाचल के लाल का कमाल: एक कोविड में ऑनलाइन पढाई कर बना IAS तो दूसरा

हिमाचल के लाल का कमाल: एक कोविड में ऑनलाइन पढाई कर बना IAS तो दूसरा

हिमाचल प्रदेश के कई छात्रों ने सफलता प्राप्त की है। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ छात्रों की कहानी जिन्होंने देश की सर्वोच्च परीक्षा पास की है। 24 साल के इशांत जसवाल ने देशभर में टॉप 100 में अपनी जगह बनाई है।

कोविड में ऑनलाइन पढाई कर बना IAS: इशांत रिटायर्ड फौजी होशियार सिंह के बेटे हैं। 2018 में एनआईटी (NIT) से बीटेक की डिग्री मैकेनिकल ट्रेड में लेने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने लगे। कुछ वर्ष नौकरी करने के बाद कोविड में वह घर आए। इस दौरान उन्होंने ऑनलाइन ही यूपीएससी की तैयारी शुरू की।

उनका यह दूसरा प्रयास था। जिसमें उन्हें अच्छी सफलता हासिल हुई। रैंक के आधार पर इशांत को भारतीय विदेश सेवा का मौका भी मिल सकता है, लेकिन उन्होंने अपनी पहली पसंद आईएएस की रखी है। आईएफएस को दूसरी ऑप्शन में रखा है। बता दें कि वैकल्पिक विषय में निशांत ने एंथ्रोपोलॉजी को चुना था।
HAS अधिकारी बना IPS:

वहीं, दूसरी तरफ जिला हमीरपुर की गलोड़ तहसील निवासीअभिषेक धीमान ने संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा उत्तीर्ण की है। उनका रैंक 374वां रहा। रैंक के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी के लिए उनका चयन हुआ है। यूपीएससी की परीक्षा में उनका तीसरा प्रयास था।

अभिषेक वर्तमान में बतौर एचएएस अधिकारी शिमला में ट्रेनिंग कर रहे हैं। इससे पूर्व खंड विकास अधिकारी के पद पर ननखड़ी में सेवाएं दे चुके हैं। ग्राम पंचायत नारा के गांव रटेड़ा के रहने वाले अभिषेक धीमान के पिता आरसी कौंडल लोक निर्माण विभाग में एसडीओ के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि माता इंदिरा रानी स्कूल लेक्चरर हैं।

फार्मासिस्ट का बेटा बना अधिकारी: जिला सोलन के बद्दी के समीपवर्ती गुल्लरवाला पंचायत के निवासी विशाल चौधरी (26 वर्ष) ने भी तीसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की है। विशाल के पिता भाग सिंह फार्मासिस्ट हैं। उन्होंने 665वां रैंक हासिल किया है।

विशाल दिल्ली स्कूल ऑफ़ कामर्स से एमफिल कर रहे हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने जेआरएफ नेट क्वालीफाई करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप भी ले लिया है। हालांकि, उनकी पहली पसंद आईएएस कैडर है, जो उन्हें नहीं मिल पाया है। जिस कारण वह दुबारा प्रयास करेंगे।

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