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कांगड़ा: साथियों की जान बचा कर खुद शहीद हो गया था हिमाचल का वीर, मणिपुर में उनके नाम पर बना चौक

कांगड़ा: साथियों की जान बचा कर खुद शहीद हो गया था हिमाचल का वीर, मणिपुर में उनके नाम पर बना चौक

कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश सरकार अपने जिस शहीद जवान की अनदेखी कर रही है। उसके मणिपुर की सरकार ने मरणोपरांत सम्मानित किया है। कांगड़ा जिला के ज्वाली उपमंडल की रजोल पंचायत के लटेर गांव के शहीद राइफल मैन भीम सेन 10 जुलाई 2002 में मणिपुर में हुए आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हुए थे।
 
मणिपुर सरकार ने सहीद के नाम का बनाया चौक: 
मणिपुर की सरकार ने राजधानी इम्फाल एक चौक का नाम शहीद राइफल मैन भीम सेन चौक कर दिया है। इम्फाल के मोर्य शहर के निकट आतंकवादियों द्वारा की गई फायरिंग व आई.ई.डी विस्फोट हमले में भीम सेन ने अपने सहयोगियों को तो बचा लिया था लेकिन खुद शहीद हो गए।

वर्ष 2004 में उनकी पत्नी को सेना का मेडल दिया गया। जिसके बाद सरकार के तरफ से सम्मान और सुविधाओं के अनेकों वादे किए गए। लेकिन एक भी वादा आज तक पूरा नहीं हो पाया है।

क्या-क्या किया गया था वादा: गांव में उनके नाम का गेट बनाया जाएगा।
गांव को सड़क से जोड़ा जाएगा। बेटे को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

ये तीन वादे कोई बहुत मुश्किल या असंभव सा नहीं प्रतीत होता है। लेकिन शहीद की पत्नी कई बार मुख्यमंत्री से मिल चुकी हैं। स्थानीय नेता भी वर्षों से दिलासा दिला रहे हैं। इस दौरान कई पार्टियों के विधायक जीते और हारे लेकिन गांव में सड़क नहीं पहुंची।

दुर्घटना में बेटा भी हो गया दिव्यांग: भीम सेन का बेटा आशीष जब 18 वर्ष का होने के बाद 33 असम राइफल यूनिट में भर्ती के लिए आवेदन दिया। 8 जून 2018 को जब आशीष भर्ती के लिए जा रहा था। रास्ते में कोटला के समीओ उसकी दुर्घटना हो गई। जिसमें वह 60 प्रतिशत तक दिव्यांग हो गया

जिसके बाद सेना के तरफ से हिमाचल प्रदेश सरकार को सिफारिश भेजी गई कि पैरा मिल्ट्री में शहीद हुए जवानों के आश्रितों को नौकरी देने की वयवस्था जो सरकार द्वारा संचालित है उसके तहत आशीष को नौकरी प्रदान की जाए। असम राइफल की सिफारिश के 3 साल बीत जाने बाद भी सरकार शहीद के बेटे को नौकरी नहीं दे सकी है।

सांसद के जानकारी में नहीं है मामला: इस पूरे मसले पर स्थानीय सांसद किशन कपूर का कहना है कि कहा कि उक्त मामला उनके संज्ञान में पहुंचा ही नहीं है। वहीं, ज्वाली विधायक अर्जुन ठाकुर ने कहा कि गांव को सड़क से जोड़ शहीद के नाम का गेट जल्द बना दिया जाएगा। नौकरी की बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखूंगा।

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