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स्वप्नदोष को दूर करने के असरदारी और फायदेमंद योग

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स्वप्नदोष के लिए योग – स्वप्नदोष या नाईटफॉल या वेट ड्रीम पुरुषो या विशेषकर युवाओ में होने वाली बहुत ही आम घटना है. स्वप्नदोष कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है जिसके द्वारा हमारा शरीर खुद से पुरुष के भीतर लगातार बन रही शुक्राणु कोशिकाओं की बहुतायत को शरीर से बाहर निकाल देती है. इसलिए जब आपके सोते समय वीर्य का स्खलन खुद से हो जाते, तब हम उस स्तिथि को स्वप्नदोष कहते हैं.

आपको बता दें कि पुरुषो की तरह महिलाओ में भी स्वप्नदोष की क्रिया होती है. मगर उसके लक्षण और कारण थोड़े अलग होते है. स्वप्नदोष के कारण अलग अलग होते है, कुछ पुरुषो में इसका कारण आपकी जीवनशैली होती है. तो कुछ में खानपान के कारण तो कुछ लोगो में यह यौन इच्छाओं को दबाने या हार्मोनल असंतुलन या हद से ज्यादा हस्तमैथुन करने के वजह से भी हो सकता है. मगर अगर इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, यौन कमजोरी , स्पर्म के काउंट की संख्या में कमी या अनिद्रा जैसे परेशानियों का कारण बन सकता है.

महीने में 1 या 2 बार स्वप्नदोष होना आम बात है. लेकिन अगर ये इससे ज्यादा बार होती है तो इसके उपचार की आवश्यकता है. वैसे तो स्वप्नदोष के कई सारे इलाज और उपचार है. लेकिन आज के इस पोस्ट में हम आपको स्वप्नदोष के लिए योग के बारे में बताने वाले हैं. योग में हर बीमारी का इलाज होता है और यह हमारे स्वास्थ्य के बहुत ही लाभकारी होता है. तो चलिए जानते हैं…

अश्विनी मुद्रा स्वप्नदोष या नाईटफॉल के लिए अश्विनी मुद्रा योग काफी फायदेमंद है. यह योग करने के लिए दोनों घुटनों पर शौच करने की स्थिति में बैठ जाएं और अपने गुदा द्वार को अंदर खींचकर कुछ सेकेंड बाद छोड़ दें. इस क्रिया को 30 से 40 बार करें और इस आसन को दिन में 2-3 बार करें. स्वप्नदोष के उपाय के साथ-साथ इस आसन से नपुंसकता का इलाज भी होता है.

वज्रोली क्रिया वज्रोली क्रिया भी नाईटफॉल के लिए एक उत्तम योगासन है. जब भी मूत्र त्याग करे तब एकदम से मूत्र को रोक ले, कुछ सेकेण्ड रोकें फिर नाड़ियों को ढीला छोड़ें और मूत्र निकलने दे. इस तरह मूत्र त्याग के दौरान कई बार इस क्रिया को करें. इस क्रिया के द्वारा नाड़ियों में शक्ति आएगी. फिर वीर्य के स्खलन को भी आप कंट्रोल कर सकेंगे. हमारा मस्तिष्क मूत्र त्याग व वीर्य स्खलन में भेद नही कर सकता. यही कारण है कि इस क्रिया द्वारा स्खलन के समय में उसी अनुपात में बढ़ोत्तरी होती है जिस अनुपात में आप मूत्र त्याग के समय कंट्रोल कर लेते है.

बाह्य कुम्भक बाह्य कुम्भक एक ऐसी योगासन है जो शीघ्रपतन और स्वप्नदोष की समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है. इस क्रिया को करने के लिए किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर पूरी शक्ति से श्वास को एक बार में ही बाहर निकाला जाता है. श्वास को बाहर निकालकर मूलबंध (गुदा द्वार को संकुचित करें) और उड्डीयान बंध (पेट को यथाशक्ति अंदर सिकोड़ें) लगाकर आराम से जितनी देर रोक सकें, श्वास को बाहर ही रोककर रखें. जब श्वास अधिक समय तक बाहर न रुक सके तब बंधों को खोलकर धीरे-धीरे श्वास को अंदर भरें यह एक चक्र पूरा हुआ. श्वास भीतर लेने के बाद बिना रोके पुनः बाहर निकालकर पहले की तरह बाहर ही रोककर रखें.

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