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पति-पत्नी के प्रेम का पर्व आज, सुहागिन रखेंगी व्रत

पति-पत्नी के प्रेम का पर्व आज, सुहागिन रखेंगी व्रत

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में करवा चौथ के व्रत का विशेष महत्व है। इस साल करवा चौथ का व्रत आज रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं अखण्ड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। करवा चौथ के दिन सुहागिन और विवाह योग्य लड़कियां सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जल व्रत रखती हैं। व्रत का पारण करवा माता और गौरी-गणेश के पूजन के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर किया जाता है। 

योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 2& अक्टूबर को रात्रि 12:42 बजे से शुरू होकर, 24 अक्टूबर को रात्रि 2:50 बजे तक रहेगी। इसलिए करवा चौथ का व्रत रविवार को ही रखा जाएगा। इस दिन महिलाओं को सुबह सूर्योदय के काल में स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिन भर चंद्रोदय काल तक निर्जल व्रत करना चाहिए। करवा चौथ का पूजन चंद्रोदय के बाद किया जाता है। सबसे पहले गौरी-गणेश का पूजन किया जाता है, इसके बाद करवा माता या सौभाग्य दायिनी ललिता देवी का पूजन किया जाता है।

यह है विधि जल, धूप-दीप, नैवेद्य, रोली, अक्षत, पुष्प, दूब एवं पंचामृत से विधिवत गौरी-गणेश का पूजन कर हलवा-पूड़ी का भोग लगाना चाहिए। करवा माता को शृंगार का सामान और लाल चुनरी चढ़ाई जाती है। इसके बाद व्रत कथा का पाठ करके, करवा माता की आरती करनी चाहिए। व्रत का पारण चंद्रमा को अघ्र्य देकर किया जाता है। चंद्रमा को जल, दूध, सफेद चन्दन, सफेद फूल, इत्र एवं मिश्री डालकर, पान, खड़ी सुपारी तथा अपने केश का एक कोना पकड़ कर अघ्र्य देना चाहिए। चलनी से चंद्रमा का दर्शन करने के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है। अन्त में हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपने व्रत-पूजन को करवा माता के चरणों में समर्पित करना चाहिए।

यह हैं करवा चौथ पूजन के मंत्र गणेश जी के मंत्र

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गौरी मां का मंत्र

देहि सौभाग्य आरोग्यं देहि मे परम् सुखम्।
सन्तान देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे।।

चन्द्र अघ्र्य का मत्रं एहि चन्द्र सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।

अनुकम्प्यम माम देव ग्रहाण अघ्र्यम सुधाकर:।।
सुधाकर नमस्तुभ्यम निशाकर नमोस्तुते।।

क्षमा प्रार्थना और फल प्राप्ति का मंत्र

यद्क्षर पदभृष्टम मात्राहीनम च यद् भवेत सर्वम क्षम्यताम देवि त्राहिमाम शर्णागतम।।

गतं दुखं गतं पापं गतं दारिद्र्यमेव च, आगतां सुख सम्पत्तिम सौभाग्यं देहि मे शिवे।।

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