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REET Exam 2021: रीट पेपर का साइड इफेक्ट, अवसाद में आए अब तक पांच ने दी जान

REET Exam 2021: रीट पेपर का साइड इफेक्ट, अवसाद में आए अब तक पांच ने दी जान

REET Exam 2021: राजस्थान में रीट परीक्षा का पेपर लीक होने की घटना के बाद से युवाओं में अवसाद की स्थिति बढ़ती जा रही है। जिन अभ्यर्थियों का पेपर अच्छा हुआ,उन्हें पेपर निरस्त होने का डर सता रहा है और दूसरी तरफ पेपर खराब होने से अवसाद में आए अभ्यर्थी आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं।

शुक्रवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों में तीन अभ्यर्थियों ने रीट का पेपर खराब होने के कारण आत्महत्या कर ली। प्रदेश में अब तक पांच अभ्यर्थी आत्महत्या कर चुके हैं। अवसाद के मामले में मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अब माहौल बदलने की जरूरत है। परीक्षा एक सतत प्रक्रिया है। अपने परिजनों एवं मित्रों से संवाद बनाए रखें और मन के भावों को साझा करें। बच्चे एक दिन में गलत कदम नहीं उठाते। उनके बदलते स्वभाव को हमें समय रहते समझना होगा।

अवसाद में विवाहिता ने की आत्महत्या देवली.रीट परीक्षा का पेपर देने पति के साथ अपने पीहर आई 25 वर्षीय विवाहिता ने शुक्रवार सवेरे कच्चे मकान में आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और विवाहिता को यहां राजकीय चिकित्सालय लाया गया। सहायक उप निरीक्षक सत्यनारायण मीणा ने बताया कि प्रियंका पत्नी मान सिंह मीणा निवासी जालमपुरा तहसील जहाजपुर जिला भीलवाड़ा 25 सितम्बर को अपने पति मान सिंह के साथ रीट की परीक्षा देने पीपलू जाने के लिए पीहर कास्या कॉलोनी डाबर आ गई। 26 सितम्बर को दंपती पीपलू गए और परीक्षा के बाद वापस कास्या कॉलोनी गए। तब से दोनों यही थे। प्रियंका रीट परीक्षा का पेपर खराब होने से अवसाद में थी। इस बात की जानकारी उसने परिजनों एवं पति को भी जानकारी दी थी। शुक्रवार सवेरे प्रियंका का पति मान सिंह अपनी सास के कोविड टीकाकरण करवाने डाबर कला केंद्र पर चला गया। पीछे से प्रियंका ने अपने पीहर के कच्चे मकान में आत्महत्या कर ली। रिश्ते में उसकी भाभी ने उसे आवाज लगाई तो जवाब नहीं मिला। घटना की सूचना उसके पति एवं मां को दी। उप निरीक्षक मीणा ने बताया कि पत्नी की हालत देखकर मान सिंह भी सुध-बुध खो बैठा और धारदार चाकू से अपने हाथ पर 3-4 वार कर दिए। पुलिस ने मान सिंह को चिकित्सालय में भर्ती करवाकर उपचार करवाया।

परीक्षा के बाद से था गुमसुम, बिना बताए घर से निकला था जोधपुर। रीट परीक्षा का पेपर खराब होने के चलते एक युुवक ने झील में कूदकर आत्म हत्या कर ली। युवक परीक्षा के बाद से ही उदास और गुमसुम था। पुलिस के अनुसार जालोर जिले में करड़ा थानान्तर्गत सेडिया हाल कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी महिपाल खींचड़ (23) पुत्र बाबूलाल बिश्नोई गुरुवार को घर से निकला था। घर न लौटने पर परिजन ने तलाश शुरू की, लेकिन वह नहीं मिला। तब परिजन ने कुड़ी भगतासनी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इस बीच, शाम को कायलाना झील में दरबार की बैठक के पास एक व्यक्ति का शव नजर आया। गोताखोर भरत चौधरी, जितेन्द्र मालवीय, सुनील वाल्मिकी, कमलेश, रामू, अशोक मालवीय ने मशक्कत के बाद शव बाहर निकाला। पुलिस मौके पर पहुंची। परिजन भी वहां आए और शव की शिनाख्त की। उसकी गुमशुदगी कुड़ी भगतासनी थाने में दर्ज थी ऐसे में शव उन्हें सुपुर्द किया गया। जांच के बाद शव मोर्चरी में रखवा दिया गया। राजीव गांधी नगर थानाधिकारी मूलसिंह का कहना है कि मृतक ने रीट परीक्षा दी थी। पेपर अच्छा न होने से वह गुमसुम था।

रीट का पेपर खराब होने पर युवक ने दी जान झुंझुनूं/मलसीसर. शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) का पेपर सही नहीं होने पर 35 वर्षीय एक युवक ने जान दे दी। पुलिस ने बताया कि कालियासर गांव के मनोज मेघवाल ने हाल ही में रीट की परीक्षा दी थी। परीक्षा में पेपर सही नहीं होने पर वह तीन-चार दिन से काफी परेशाान था। शुक्रवार को सुबह करीब 8 बजे वह अपने खेत में गया हुआ था। वहां उसने जान दे दी। वह शादीशुदा था। उसके दो बेटियां है। वह घर पर रहकर शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा था तथा खेती में पिता का हाथ बंटवाता था। जांच अधिकारी ने बताया कि वह पिछले कई साल से सीकर के एक मनोचिकित्सक से उपचार करवा रहा था। परीक्षा के बाद दोस्तों से कह रहा था कि उसका पेपर खराब हो गया।

जरूरत सिर्फ धैर्य की परीक्षा एक सतत प्रक्रिया है। अपने परिजनों एवं मित्रों से संवाद बनाए रखें और मन के भावों को साझा करें। हर परेशानी का हल संभव है, जरूरत सिर्फ धैर्य रखने की होती है।

डॉ. अखिलेश जैन, मनोरोग विभागाध्यक्ष, ईएसआई अस्पताल जयपुर

माहौल बदलना होगा पेपर खराब होने के बाद अस्कर अवसाद में आए युवा आत्महत्या कर लेते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि कुछ लोगों ने ऐसा माहौल बना दिया कि सरकारी नौकरी ही श्रेष्ठ है। माता-पिता बच्चों पर सरकारी नौकरी का दबाव नहीं बनाएं। निजी नौकरी में भी अनेक अवसर हैं। बच्चे एक दिन में गलत कदम नहीं उठाते।

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