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क्यों धारण किया था हनुमान जी ने अपना पंचमुखी रूप, नहीं करनी चाहिए इस विकराल रूप की पूजा

क्यों धारण किया था हनुमान जी ने अपना पंचमुखी रूप, नहीं करनी चाहिए इस विकराल रूप की पूजा

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमरे हनुमत बलबीरा.. हनुमान चालीसा की यह चौपाई तो आपने सुनी ही होगी | इसका अर्थ है जो व्यक्ति महाबली हनुमान का स्मरण करता है उसके सारे दुःख स्वतः ही मिट जाते है | यह सभी लोग जानते है की रामायण में यदि हनुमान जी भगवान राम के साथ ना होते तो रावण को हरा पाना मुश्किल होता | हम सभी लोग हनुमान जी के पंचमुख रूप को देखते है | लेकिन क्या आप जानते है की हनुमान जी ने यह पंचमजुख रूप क्यों धारण किया था ? आज हमारे आर्टिकल के द्वारा हम आपको यही बताने जा रहे है | इसके साथ ही हनुमान जी के इस विकराल रूप की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए यह भी हम आपको बताएँगे |

जब रामायण में वीरवर लक्ष्मण ने देवताओ के पम शत्रु इंद्रजीत का वध कर दिया था | उस समय हनुमान जी को यह भान हो गया था की अब रावण चुप नहीं बैठेगा | इसलिए उन्होंने भगवान राम की सुरक्षा बड़ा दी थी | रावण ने अपने भाई अहिरावण को पाताल लोक से बुलाकर कहा था की यदि तुम राम लक्ष्मण को मेरे रास्ते से हटा दो तो तुम्हे मुँह माँगा इनाम दिया जायेगा | इसके पश्चात अहिरावण ने राम की सेना में जाकर उनका अपहरण करने का विचार किया | लेकिन सेना को इस तरह चौकन्ना देखकर वह अपने स्वरुप में राम लक्ष्मण के पास नहीं जा सका |

इसके बाद उसने विभीषण का रूप धारण किया और राम लक्ष्मण का अपहरण कर पातळ लोक ले गया | हनुमान जी को जब यह पता चला तो वह अपने प्रभु की तलाश में पाताल लोक तक जा पहुंचे | जहां उनकी अपने पुत्र मकरध्वज से मुलाकात हुई | इसके बाद जब हनुमान जी पाताल लोक में गये तो उन्होंने माता कामाक्षी के दर्शन किये | इसी माता के सामने अहिरावण राम और लक्ष्मण की बलि देना चाहता था | जब हनुमान जी ने माता कामाक्षी से पूछा की क्या वह राम-लक्ष्मण की बलि चाहती है तो उन्होंने मना कर दिया और उन्होंने कहा की मुझे अहिरावण की बलि चाहिए |

हम आपको बता दें की अहिरावण परम शक्तिशाली था | वह मायावी विद्याओ में निपुण था | वह पराक्रम में रावण और बल में बाली के समान था | इसलिए उसे हरा पाना किसी साधारण योद्धा के बस में नहीं था | यह बात हनुमान जी भी जानते थे | इसलिए उन्होंने माता कामाक्षी से अहिरावण की मृत्यु का रहस्य पूछा | माता कामाक्षी ने कहा की उनके सामने अहिरावण ने यह पांच दीपका जलाये है | इसलिए यदि कोई व्यक्ति एक साथ इन्हे बुझा पाये तो ही अहिरावण का वध किया जा सकता था |

इस समय हनुमान जी ने अपना विकराल रूप धारण किया और पंचमुखी रूप बनाकर एक साथ 5 दीपको को बुझा दिया | इसके पश्चात् उन्होंने अहिरावण का वध कर दिया | जिससे माता कामाक्षी ने भी हनुमान जी को वरदान दिया की युद्ध में ऐसा कोई भी जीव नहीं होगा जो तुम्हे परास्त कर सके | ऐसा कहा जाता है की जो भी व्यक्ति इस विकराल रूप की पूजा करता है वह शीघ्र ही बर्बाद हो जाता है | इसके पीछे अलग-अलग विद्वान अपना अलग मत प्रस्तुत करते है | लेकिन सर्वप्रमाणित मत यह है की हनुमान जी इस समय क्रोधित अवस्था में यदि कोई व्यक्ति उनके इस रूप की पूजा करता है तो वह शीघ्र ही कंगाल हो जाता है |

क्योंकि हनुमान जी इस समय अत्यंत ही क्रोधित अवस्था में है | इसलिए जो कोई भी व्यक्ति इनके दर्शन करता है या इनकी पूजा करता है वह उनके इस क्रोध का शिकार हो जाता है | इसलिए कभी भी हनुमान जी के इस रूप की पूजा नहीं करनी चाहिए | यदि किस घर में भी हनुमान जी के इस विकराल रूप की प्रतिमा रखी हो तो उसे तुरंत हटा दिया जाना चाहिए |

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