Breaking News

मंदिर का पानी ठीक करता है आंखें, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं भाला

मंदिर का पानी ठीक करता है आंखें, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं भाला

सिंगोली के पास स्थित सूलाबावजी का मंदिर आंखों के दाता के मंदिर के रूप में ख्यात है। मान्यता है कि यहां का पानी पीने से आंखों की बीमारियां ठीक हो जाती हैं। कई लोग इसे अंधविश्वास से जोड़ते हैं, जबकि कईयों के लिए यह आस्था का केंद्र है। यही वजह है कि यहां आने के बाद जिनकी आंखें ठीक हुई वे मंदिर में लोहे के भाले चढ़ाते हैं। मंदिर के पास ऐसे भालों का ढेर लगा है, जो लोगों में मंदिर के प्रति आस्था का प्रमाण है।

300 साल पुराना है मंदिर रतनगढ़-सिंगोली रोड के किनारे स्थित सूलाबावजी का मंदिर करीब 300 साल पुराना है। सिंदूर लगी सूलाबावजी की प्रतिमा के सामने अखंड धूनी लगी है। पास ही में एक कुआं है। मान्यता है कि इसी कुएं का पानी पीने व आंखों पर छिड़कने, धूनी की भस्म लगाने व सूलाबावजी के दर्शन करने से आंखें ठीक हो जाती हैं। यही वजह है कि रविवार को यहां काफी भीड़ उमड़ती है। जिनकी आंखें ठीक होती हैं वे यहां भाला चढ़ाने आते हैं। मंदिर में चारों तरफ ऐसे अनगिनत भाले हैं। मंदिर के पास लगे ढेर में तो 5 हजार से भी ज्यादा भाले हैं। कई श्रद्धालु तो यहां चांदी की आंख भी चढ़ाते हैं।

कभी खराब नहीं होता कुएं का पानी पुजारी जगदीश पुरी बताते हैं सूलाबावजी मंदिर के कुएं का पानी कभी खराब नहीं होता । यह पानी व भस्म लगाने से आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं। उनकी मानें तो दिल्ली, महाराष्ट्र व राजस्थान सहित मध्यप्रदेश के कई स्थानों से श्रद्धालु यहां आते हैं। आंखें ठीक होने पर लोहे के भाले चढ़ाए जाते हैं। साथ ही चांदी की आंखे भी मंदिर में चढ़ाई जाती हैं।

अस्पतालों से हारे, सूलाबावजी के द्वारे कथावाचक पं. भीमाशंकर शास्त्री के पिता पं. कमलाशंकर की आंखों में भी असाध्य बीमारी थी। उन्होंने बताया उन्होंने नीमच, उदयपुर व अहमदाबाद में इलाज कराया लेकिन लाभ नहीं हुआ। परिजन उन्हें सूलाबावजी मंदिर लाए। इसके बाद महीने भर में ही कमलाशंकर शास्त्री की अांखें ठीक हो गईं।

सूला ज्योति रखा नाम अंबा के ठाकुर परिवार की बेटी ज्योति को बचपन से ही दिखाई नहीं देता था। चार साल की उम्र में सूलाबावजी के मंदिर ले गए। छह महीने तक मंदिर की भस्म लगाई व पानी पिलाया। कुछ दिन में ज्योति की आंखों की रोशनी लौट आई। इससे परिवार ने उसका नाम सूलाज्योति ही रख दिया।

रोशनी आई तो चढ़ाया भाला अतवा की मोहिनीबाई को छह महीने पहले तेज बुखार आने के बाद आंखों की रोशनी चली गई। पति प्रकाश मोहिनी को सूलाबावजी मंदिर ले गए। आठ दिन में आंखों की रोशनी आ गई।
पानी में औषधीय तत्व मिनरल्स से संभव है

नीमच पीजी कॉलेज (केमेस्ट्री) के प्रोफेसर डॉ. बीके दानगढ़ ने बताया सूलाबावजी मंदिर के पानी से आंखें ठीक होने के बारे में मैंने भी सुना है। मंदिर पहाड़ी इलाके में है। संभव है कुएं के पानी में कुछ मिनरल्स व औषधीय तत्व हों जो आंखों की बीमारी ठीक करने में सहायक हों। पीएचई विभाग यदि पानी की जांच कराए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इसी तरह सरकारी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. किरण बंसल ने बताया कभी-कभी पानी में मिनरल्स या एंटीसेप्टिक तत्व होने से भी ऐसा हो सकता है। ऐसा पानी आंखों में लगने से बीमारी ठीक हो सकती है। भस्म लगाने से ठीक हो, ऐसा नहीं लगता।

No comments