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इस आरती को पढ़ करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा, मिलेगा फायदा

इस आरती को पढ़ करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा, मिलेगा फायदा

आज भारत में विश्‍वकर्मा पूजा की जा रही है। हिंदू मान्‍यता के अनुसार इस दिन निर्माण के देवता विश्‍वकर्मा का जन्‍म हुआ था। विश्‍वकर्मा को देवताओं के वास्‍तुकार थे। उन्‍होंने देवताओं के महल, हथियार और भवन बनाए थे। इस दिन औजारों, मशीनों और दुकानों की पूजा करते हैं।

कहा जाता है कि एक बार देवताओं ने असुरों से परेशान होकर विश्‍वकर्मा से गुहार लगाई। तब विश्वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों से देवताओं के राजा इंद्र के लिए एक वज्र बनाया। इस वज्र से असुरों का सर्वनाश हो गया। तभी से भगवान विश्‍वकर्मा को अहम स्थान दिया गया। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने रावण की लंका, कृष्‍ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्‍थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया था।

साथ ही उन्होंने उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण अपने हाथों से किया था। उन्‍होंने भगवान शिव के त्रिशूल, भगवान विष्‍णु के सुदर्शन चक्र और यमराज के कालदंड जैसे हथियार बनाए। उन्‍होंने दानवीर कर्ण के कुंडल और रावण का पुष्‍पक विमान भी बनाए थे।

पूजा विधि
आज के दिन अपनी गाड़ी, मोटर या दुकान की मशीनों को साफ करें।
घर के मंदिर में विष्‍णु जी का ध्‍यान करें और फूल चढाएं।
कमंडल में पानी लेकर उसमें फूल डालें और विश्वकर्मा भगवान का ध्यान करें।
जमीन पर आठ पंखुड़‍ियों वाला कमल बनाएं और उसपर सात प्रकार के अनाज रखें।
अनाज पर तांबे या मिट्टी के बर्तन के पानी का छिड़काव करें।
सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी और दक्षिणा को कलश में डालकर उसे कपड़े से ढकें।
भगवान विश्‍वकर्मा को फूल चढ़ा और आरती उतारें।

विश्‍वकर्मा की आरती
ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

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