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इन छोटी-छोटी 16 चीजों से करें माता लक्ष्मी की पूजा, फिर देखें चमत्कार

इन छोटी-छोटी 16 चीजों से करें माता लक्ष्मी की पूजा, फिर देखें चमत्कार

धनिया, श्वेत आक, बांस, आम्र पल्लव व काष्ठ, बेल और बिल्व पत्र, गाय का घी, शहद, केसर, बताशे, चमेली, लाल कनेर, कमलगट्टा, काला तिल, एकाक्षी नारियल, शमी और धान का लावा धन को आकर्षित करते हैं। इन पदार्थों और वनस्पतियों से लक्ष्मी पूजन शिखर पर ले जाता है, ऐसा मान्यताएं कहती हैं।

प्रश्न: किसी ने कहा है कि मेरा राहु खराब है, जो जीवन में तबाही ला सकता है। मेरी कुंडली नहीं है। बचाव का क्या कोई उपाय है क्या? -रेणु रॉय

उत्तर: सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि यदि अपराध और अपराधियों के प्रति आकर्षण पैदा होने लगे, स्पर्म काउंट घटने लगे, नपुंसक न होते हुए भी नपुंसकता का अहसास होने लगे, अनजानी बीमारियां घेर लें, डायबीटीज, थायरॉइड, मोटापा, दमा या फेफड़ों की बीमारियां घेर लें, जुखाम रहने लगे, नाक बहने लगे, दवा का असर न हो, औलाद का सुख न मिले, अपने लोग धोखा देने लगें या कंगाल बना दें, यदि जवानी में रिटायरमेंट ले लें या लेना पड़े, तो यह कुंडली में राहु के खराब होने का संकेत है। इसके लिए मिथ्या वचनों व अपशब्दों का त्याग, असहायों और बेघरों की सहायता तथा पक्षियों को बाजरे का भोजन अर्पित करने से लाभ होगा, ऐसा मैं नहीं मान्यताएं कहती हैं।

प्रश्न: क्या रविवार को जन्मे लोग क्रोधी होते हैं? -मोनिका बरनवाल

उत्तर: रविवार को जन्मे लोगों पर सूर्य का पूर्ण प्रभाव होता है। इनकी हिम्मत, जिद, जुनून इनकी ताकत है, तो क्रोध इनकी कमजोरी। इनका व्यक्तित्व आकर्षक व प्रभावशाली होता है। ये लोग महत्वाकांक्षी होते हैं और अपने परिश्रम से असंभव को भी संभव करने का दम रखते हैं। किसी के जीवन में ये दखल न देते हैं, न ही अपने जीवन में किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त करते हैं। समृद्धि इनका चरण चुंबन करती है। ये समृद्ध व ऐश्वर्यवान होते हैं। किसी के अधीन काम करना इनके स्वभाव के विपरीत है। राजनीति में इनकी रुचि या पकड़ बनी रहती है। ये अपने कुल कुटुंब में कुलदीपक की तरह होते हैं। ये किसी के दबाव में कभी नहीं आते। इनकी खरी-खरी बातें दूसरों के हृदय को नश्तर सी छेद देती हैं, पर इनका मन शुद्ध होता है।

प्रश्न: भविष्य प्लॉट और गाड़ी पर विचार करने के लिए कुंडली के किस भाव को देखना चाहिए? -उमेश त्यागी
उत्तर: सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव से अचल संपत्ति, प्लॉट, बगीचा, भवन और वाहन की स्थिति जानी जाती है। इसे सुख भाव भी कहते हैं। इस घर से जीवन में सुख, आनंद और ऐश्वर्य का बोध होता है। मानसिक क्षमता, सीने और उदर कष्टों का आकलन इसी भाव से किया जाता है। इसी भाव से मित्रों के सहयोग, असहयोग और उनकी स्थिति का अध्ययन होता है। मां और मां के सुख से संबंधित गणना इसी भाव से होती है।

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