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रामसेतु में प्रयोग हुए पत्थरों को देखे, कैसे पानी में तैरते हैं

रामसेतु में प्रयोग हुए पत्थरों को देखे, कैसे पानी में तैरते हैं

भारत भूमि के कन कन में आध्यत्म और भगवत्ता विराजमान है, यह भूमि, मन्दिरों, गुरुओं योग अध्यात्म की जननी रही है. जिस राम भगवान और राम सेतु को ले के कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था का राम और राम सेतु दोनों ही काल्पनिक पात्र हैं और उनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है, उसके प्रमाण आज भी इस पावन धरती पे मौजूद हैं.

विडियो में राम सेतु में प्रोयग हुए पत्थरों को देखें !

रामसेतु रामसेतु,  अंग्रेजी: (Adam’s Bridge; आदम का पुल), तमिलनाडु, भारत के दक्षिण पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम द्वीप तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के मध्य पत्थर से बनी एक शृंखला है। भौगोलिक प्रमाणों से पता चलता है कि किसी समय यह सेतु भारत तथा श्रीलंका को भू मार्ग से आपस में जोड़ता था।

हिन्दू पुराणों की मान्यताओं के अनुसार इस सेतु का निर्माण अयोध्या के राजा राम श्रीराम की सेना के दो सैनिक जो की वानर थे, जिनका वर्णन प्रमुखतः नल-निल नाम से रामायण में मिलता है, द्वारा किये गया था. क्या है रामसेतु ??धर्म की मान्यताओं और कहानियो के अनुसार जब रावण सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया था तब श्रीराम ने वानरों की सेना की सहायता से समुद्र के बीच एक पुल का निर्माण किया था. और इस पुल को ‘रामसेतु’ नाम दिगा गया, इसी रामसेतु पुल से श्रीराम की पूरी वानर सेना गुजरी और रावण पर विजय हासिल की.

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