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हिमाचल : फिर उठी डलहौजी का नाम बदलने की मांग, पंचायत राज मंत्री ने कहा-CM को लिखेंगे latter

हिमाचल : फिर उठी डलहौजी का नाम बदलने की मांग, पंचायत राज मंत्री ने कहा-CM को लिखेंगे latter

हिमाचल प्रदेश की ख्यात पर्यटन नगरी डलहौजी का नाम बदलने की मांग फिर उठी है। पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा है कि वे पहले भी यह मांग कर चुके हैं और अब इस बारे में सीएम जयराम को चिट्ठी लिखने वाले हैं। डलहौजी का नाम बदलकर नेताजी सुभाष के नाम पर सुभाष नगर करने की मांग नई नहीं, बरसों पुरानी है।
कंवर का कहना है कि नेताजी सुभाष बोस अंग्रेज डलहौजी से अधिक प्रसिद्ध हैं और यदि इस नगरी का नाम उनके नाम पर होता है तो यहां के लोगों को अधिक प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति होगी। हालांकि होटल व्यवसाय से जुड़े यहां के कारोबारी खुलकर इस मांग के समर्थन में नहीं हैं।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश की इस पर्यटन नगरी डलहौजी से आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का गहरा नाता है। वर्ष 1937 में सुभाष चंद्र बोस ने डलहौजी में लगभग सात महीने बिताए थे और स्वास्थ्य लाभ लिया था। आज भी उनकी याद में डलहौजी के एक चौक का नाम सुभाष चौक है। उनकी आदमकद प्रतिमा भी स्थापित है।

गांधी चौक के नजदीक सुभाष बावली नामक पर्यटन केंद्र स्थल है, जहां रोजाना सुभाष चंद्र बोस बावड़ी का पानी पीते थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1937 में जब ब्रिटिश हुकूमत के अधीन आजादी की लड़ाई के चलते जेल में बंद थे तो उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पैरोल पर रिहा किया था। उस समय वह स्वास्थ्य लाभ के लिए डलहौजी आए थे।

डलहौजी के सरकारी स्कूल का नाम भी नेता जी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखा गया है। पश्चिम बंगाल से डलहौजी में काफी पर्यटक आते हैं और नेता जी की यादों से जुड़े सभी पर्यटन केंद्र स्थलों का अवलोकन करते हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी लिख चुके हैं चिट्ठी
चंबा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल डलहौजी का नाम बदलने का मामला उठता रहा है। कोई साल भर पहले भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सूबे के राज्यपाल को पत्र लिखकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अजय जग्गा की पुरानी मांग पर विचार करते हुए इस शहर का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर कर करने की बात कही थी।

30 साल पहले वीएचपी ने उठाई थी मांग
विश्व हिदू परिषद ने करीब 30 वर्ष पूर्व डलहौजी का नाम बदलकर सुभाष नगर रखने के लिए आवाज उठाई थी। इसके उपरांत भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए डलहौजी का नाम बदलने संबंधी बाकायदा अधिसूचना भी जारी की थी। विश्व हिदू परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि यह अधिसूचना प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद फाइलों में दफन हो गई।

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