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लंबी जिंदगी के लिए रोज खाएं ये एक चीज, जानें 10 साल ज्यादा जीने का सीक्रेट

लंबी जिंदगी के लिए रोज खाएं ये एक चीज, जानें 10 साल ज्यादा जीने का सीक्रेट

सेहतमंद, खुशनुमा और लंबी जिंदगी की ख्वाहिश भला किसे नहीं है. एक इंसान की लंबी आयु के पीछे बहुत सारे फैक्टर्स होते हैं जिनमें से कुछ हमारे कंट्रोल के बिल्कुल बाहर हैं- जैसे कि जेनेटिक्स. लेकिन इसमें खान-पान से जुड़ी आदतों की भी अहम भूमिका होती है. एक अच्छा डाइट प्लान आपकी उम्र बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है.

PLOS मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर कोई 20 वर्षीय व्यक्ति अपनी डाइट में ज्यादा फल, हरी सब्जियां, फलियां और साबुत अनाज शामिल कर ले और साथ ही प्रोसेस्ड फूड पर भी लगाम कस दे तो उसकी उम्र में 10 से 13 वर्ष तक का इजाफा हो सकता है. शोधकर्ताओं का दावा है कि यदि 60 साल की उम्र में भी कोई इंसान ज्यादा हेल्दी डाइट लेने की शुरुआत करता है तो उसकी आयु भी 8 से 9 साल तक बढ़ सकती है.

मेडिटेरेनियन डाइट का कमाल
मेडिटेरेनियन डाइट जिसमें ऑलिव ऑयल, बादाम, बीज, फलियां और मछली जैसी चीजें शामिल होती हैं, जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में कारगर हो सकती है. इस डाइट्री पैटर्न में एंटी-इनफ्लेमेटरी के गुण हमारे लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. हालांकि, अगर आप मेडिटेरेनियन डाइट की बजाए कुछ चुनिंदा चीजों के बारे में जानना चाहें तो इसके भी कुछ विकल्प मौजूद हैं.

अखरोट-बादाम खाने से बढ़ेगी उम्र
इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप अपनी डेली डाइट में ड्राई फ्रूट्स को शामिल करें. अखरोट, बादाम से लेकर पिस्ता तक सभी जबरदस्त सुपरफूड हैं, जिन्हें आप स्नैक्स के रूप में खा सकते हैं. हेल्दी फैट, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, कई प्रकार के विटामिन, मिनरल और प्लांट बेस्ड फूड से ना सिर्फ आपकी बॉडी को एनर्जी मिलती है, बल्कि इसमें कई खास पोषक तत्व भी होते हैं.

ड्राई फ्रूट्स ना सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि इनका नियमित सेवन कोलेस्ट्रोल लेवल कम करता है. ब्लड शुगर लेवल भी बैलेंस रहता है और वजन कंट्रोल रहता है जिससे हम मोटापे का शिकार नहीं होते हैं. एक्सपर्ट्स का दावा है कि अखरोट-बादाम की संतुलित खुराक हमें एक हेल्दी और लंबी जिंदगी देने में मदद करती है.

20 स्टडीज का मूल्यांकन करने वाले मेटा एनालिसिस के परिणाम बताते हैं कि रोजाना करीब 28 ग्राम ड्राई फ्रूट खाने से किसी भी कारणवश होने वाली मौत का जोखिम 22 प्रतिशत तक कम हो जाता है. इसके परिणाम ये भी बताते हैं कि इससे रेस्पिरेटरी डिसीज, डायबिटीज, न्यूरोडीजेनरेटिव डिसीज, इंफेक्शन डिसीज और किडनी डिसीज से मौत का खतरा भी काफी कम हो जाता है.

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