Breaking News

मिल गया कोरोना का 'ब्रह्मास्त्र', बस 2 मिनट में 99 फीसदी वायरस को कर देगा खात्म

मिल गया कोरोना का 'ब्रह्मास्त्र', बस 2 मिनट में 99 फीसदी वायरस को कर देगा खात्म

कोरोना का संक्रमण दुनियाभर के लिए गंभीर समस्या का कारण बना हुआ है। डेल्टा जैसे कोरोना के वैरिएंट्स को काफी खतरनाक माना जा रहा है, जो गंभीर रोग के साथ मृत्युदर को भी बढ़ा सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कमजोर इम्युनिटी जैसे जोखिम कारक लोगों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं, ऐसी स्थिति में सभी लोगों को लगातार बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। इस बीच कोरोना संक्रमितों के इलाज को लेकर शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। मुंबई स्थित फार्मा कंपनी ग्लेनमार्क ने कोविड-19 संक्रमितों के इलाज के लिए नाइट्रिक ऑक्साइड नेज़ल स्प्रे लॉन्च किया है। कनाडा की दवा कंपनी सैनोटाइज के साथ साझेदारी में फेबीस्प्रे कंपनी ने इसे लॉन्च किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से पहले ही नाइट्रिक ऑक्साइड नेजल स्प्रे (एनओएनएस) के निर्माण और मार्केटिंग की मंजूरी मिल चुकी थी। कंपनी का दावा है कि कोविड-19 रोगियों के इलाज में इस नेजल स्प्रे से खासा मदद मिल सकती है। आइए इसके बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।

कोरोनावायरस पर प्रभावी है नेजल स्प्रे रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नेजल स्प्रे की मदद से ऊपरी वायुमार्ग में कोरोना वायरस को मारने में मदद मिल सकती है। अध्ययन में नेजल स्प्रे के एंटी-माइक्रोबियल गुणों को सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ काफी प्रभावी पाया गया है। नाक के म्यूकोसा पर इसके छिड़काव के बाद यह वायरस के खिलाफ एक भौतिक और रासायनिक बैरियर बनाता है जो कोरोनावायरस को बढ़ने और फेफड़ों में फैलने से रोकने में मदद करता है। दवा निर्माताओं का कहना है कि अगर संक्रमण का पहले ही पता चल जाए तो इस नेजल स्प्रे के साथ नाक में ही कोरोनावायरस को खत्म करने में मदद मिल सकती है।

तीसरे चरण के परीक्षण में दिखे अच्छे परिणाम नेजल स्प्रे की प्रभाविकता को जानने के लिए देश के 20 क्लिनिकल साइटों पर इसके तीसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण किया गया। इसके तहत 306 रोगियों को नेजल स्प्रे देकर इसकी प्रभावकारिता और सुरक्षा का मूल्यांकन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह बहुत ही प्रभावी ढंग से वायरस को निष्क्रय करने में मदद करता है, साथ ही समय पर इसका इस्तेमाल करके रोग को बढ़ने, विशेषकर फेफड़ों में संक्रमण जैसी गंभीर स्थिति को रोकने में मदद मिल सकती है। अमेरिका की यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी में किए गए अध्ययनों के अनुसार, इस नेजल स्प्रे की मदद से 2 मिनट के भीतर अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और एप्सिलॉन जैसे वैरिएंट को 99.9 प्रतिशत को मारने असरदार साबित हो सकती है।

क्या कहना है अध्ययनकर्ताओं का अध्ययन के प्रमुख डॉ श्रीकांत कृष्णमूर्ति ने रिपोर्ट में बताया,नाइट्रिक ऑक्साइड नेजल स्प्रे का इस्तेमाल वायरल लोड को आसानी से कम करने में सहायक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका इस्तेमाल संक्रमण की चेन को तोड़ने में काफी मददगार साबित हो सकती है। तीन चरणों के परीक्षण में इस नेजल स्प्रे को सुरक्षित पाया गया है और कोरोना के इलाज की दिशा में यह काफी महत्वपूर्ण और आकर्षक हो सकता है।

यूरोप में मिला सीई मार्क दवा कंपनी ने दावा किया है कि इस नेजल स्प्रे को यूरोप में पहले ही सीई मार्क मिल चुका है, जो मेडिकल डिवाइस के मामले में मार्केटिंग ऑथराइजेशन के बराबर है। भारत में इसके इस्तेमाल की मंजूरी को लेकर फिलहाल रिपोर्ट में कोई अपडेट नहीं है।

No comments