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आज भी डोगरा जवानों का हौसला बढ़ाता है लता मंगेशकर का ये गीत

आज भी डोगरा जवानों का हौसला बढ़ाता है लता मंगेशकर का ये गीत

सरहदों की रक्षा कर बलिदान देने वालों को अपने गीतों से अमर करने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर डोगरा सैनिकों व उनके स्वजन के दिल में हमेशा रहेंगी। लता दीदी जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान और चीन से लड़ी जंगों में डोगरा सैनिकों की वीरता की भी कायल थीं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर की लेखिका दिवंगत पदमा सचदेव जब लता मंगेशकर के पास पहुंचीं थी तो वह डोगरा सैनिकों की सराहना करते हुए इन पर बहादुरी भरे गीतों को आवाज से अमर करने के लिए तैयार हो गर्इं। इसके बाद उन्होंने ..भला सपाहिया डोगरेया गीत गाया तो सैनिकों में जोश भर पाया।

जम्मू के डोगरी कवि कृष्ण समैलपुरी के लिखा गीत डोगरा सैनिक पर था जो सरहद पर तैनात हैं और घर में उसकी विवाहिता छुट्टी पर अपने का बेसब्री से इंतजार कर रही है। भले ही इसे गीत में लता ने डोगरा सैनिक के परिवार की मनोस्थिति को उजागर किया हो, लेकिन यह देश के हर सैनिक के परिवार की सोच है।

सैनिकों के प्रति असीम प्रेम था

लता जी के दिल में सैनिकों के प्रति असीम प्रेम था। उनके गीत सुनकर युवा अधिकारी के रूप में मेरा भी खून खोलता था। ऐसे में जब वह वर्ष 1979 में राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी का सैन्य सचिव था तो मुझे कई बार उनसे मिलने का मौका मिला। मैंने उनका आभार जताया तो उन्हें मुझसे कहा कि मुझे डोगरा सैनिकों व जम्मू-कश्मीर के लोगों के योगदान के बारे में अच्छी तरह से पता है।

जब स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने गढ़वाली में दिया 'रैबार'

वर्ष 1989 की बात है, निर्माणाधीन गढ़वाली फिल्म 'रैबार' के सोलो गीत की मुंबई में रिकार्डिंग चल रही थी। इसके लिए हमने लालचंद रिकार्डिंग थिएटर को बुक कराया हुआ था। स्वर कोकिला लता मंगेशकर भी उन दिनों उसी थिएटर में रियाज के लिए आती थीं। जब हमें इस बारे में पता चला तो थिएटर के स्वामी से संपर्क किया और पूछा कि क्या लताजी हमारी फिल्म का एक गाना गा सकती हैं। हम इंतजार कर रहे थे कि गीत की फीस कितनी होगी, लेकिन बिना फीस की बात किए ही लताजी ने गीत के लिए हां कर दी। वह मुझसे बोलीं, 'घबराएं नहीं, इस गीत का मुझे हिंदी में अर्थ बता दीजिए, इसे मैं जरूर गाऊंगी। क्योंकि, विशेष रूप से पहाड़ के गीत मैंने पहले कभी नहीं गाए। मुझे पहाड़ बेहद पसंद है।' सुर साम्राज्ञी भारत रत्न लता मंगेशकर से जुड़ी यह यादें फिल्म 'रैबार' के लिए 'मन भरमै गे' गीत लिखने वाले गीतकार देवी प्रसाद सेमवाल ने 'दैनिक जागरण' से साझा कीं।

छत्तीसगढ़ बोली में भी एक गीत में दी थी आवाज

लता मंगेशकर ने छत्तीसगढ़ी फिल्म भखला के लिए एक गीत गाया था। यह गीत छत्तीसगढ़ में शादी के बाद बेटी की विदाई को लेकर है। गीते के बोल 'छूट जाही अंगना अटारी.. छूटही बाबू के पिठइया' थे। इस गीत को मदन शर्मा लिखा था और संगीतकार कल्याण थे। दोनों छत्तीसगढ़ के है।

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