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सोने से पहले और उठने के बाद, इतने फीसदी लोग जरूर चेक करते हैं मोबाइल, जानें टेक्नोलॉजी कैसे कर रही सेहत बर्बाद

सोने से पहले और उठने के बाद, इतने फीसदी लोग जरूर चेक करते हैं मोबाइल, जानें टेक्नोलॉजी कैसे कर रही सेहत बर्बाद

टेक्नोलॉजी हर जगह है। आप किसी न किसी प्रकार की टेक्नोलॉजी का सामना किए बिना न तो उड़ सकते हैं और न ही सड़क पर घूम सकते हैं। टेक्नोलॉजी के बिना तो परिवार से जुड़ना भी मुश्किल है। हमारे पास ऐसी टेक्नोलॉजी है जो हमें आपस में बात करने, संगीत सुनने और पढ़ने की अनुमति देती है। कई लोगों के पास वीडियो गेम कंसोल, स्वास्थ्य देखभाल ऐप्स और ऑनलाइन सीखने के संसाधन मौजूद है। टेक्नोलॉजी आज हमारे जीवन के हर पहलू में शामिल है।

लोगों ने टेक्नोलॉजी को इस कदर अपना लिया है कि वे वास्तविक जीवन में जीने के बजाय वर्चुअल दुनिया में ही जीना पसंद करते हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स की मौजूदगी बढ़ रही है। 87 प्रतिशत मिलेनियल्स कहते हैं कि वे अपने स्मार्टफोन से दूर नहीं रह सकते। 80 प्रतिशत सुबह उठने के बाद सबसे पहले अपना स्मार्टफोन चेक करते हैं। 88 प्रतिशत साप्ताहिक आधार पर अपने फोन का कैमरा इस्तेमाल करते हैं।

टेक्नोलॉजी का हमारे फिजिकल और मेंटल हेल्‍थ पर कैसे निगेटिव असर पड़ता है, इसके बारे में iThrive की CEO और फाउंडर, फंक्शनल न्यूट्रिशनिस्ट, मुग्धा प्रधान बता रही हैं।

​ईएमएफ रेडिएशंस के हानिकारक प्रभाव


टेक्नोलॉजी में हो रही प्रगति ने लोगों को रोजमर्रा के जीवन में ईएमएफ के प्रति एक्सपोज कर दिया है। वे माइक्रोवेव, मोबाइल, वायरलेस या ब्लूटूथ हेडफोन, हेयरड्रायर, इलेक्ट्रिक शेवर और वाईफाई जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं और इससे ईएमएफ के संपर्क में आते हैं। इन उपकरणों ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है परंतु इसमें से रेडियोफ्रिक्वेंसी तरंगे निकलती हैं जो हमारी सेहत के लिए हानिकारक होती हैं। ईएमएफ के संपर्क में आने से यह हो सकता हैः

जलन, बालों का झड़ना, और त्वचा, अंग और ऊतक को नुकसान
मतली और उल्टी
सिरदर्द
एकाग्रता में समस्या
दस्त
नींद में खलल या अनिद्रा, और इसी तरह की अन्य समस्याएं।

Tip: सोने से पहले अपना वाईफाई बंद कर दें।
बॉडी का पोस्चर हो जाता है गलत

जो लोग मोबाइल उपकरणों का बहुत अधिक उपयोग करते हैं या अपने लैपटॉप या कंप्यूटर पर लगातार एक ही स्थिति में काम करते हैं, उनका पोस्चर खराब होने लगता है। यदि इसे जल्दी ठीक नहीं किया गया, तो इससे मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं हो सकती हैं जैसे गर्दन और कंधों में दर्द या पीठ के निचले हिस्से में दर्द। इससे आपकी उंगलियों, अंगूठे और कलाई में दर्द भी हो सकता है।

Tip: काम करते समय एर्गोनोमिक टूल का उपयोग करना शुरू करें।
​डिजिटल आईस्ट्रेन (आंखों में स्‍ट्रेन):

मोबाइल उपकरणों, लैपटॉप्स, ई-रीडर्स आदि के लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल से आपकी आखों को नुकसान पहुंच सकता है। आंखों में स्‍ट्रेन विकसित हो सकता है। आईस्ट्रेन एक व्यापक शब्द है, जिसमें आंखों में सूखापन, सिरदर्द, धुंधलापन और गर्दन और/या कंधों में दर्द शामिल है।

Tip: दिन में दो बार अपनी आंखों को ठंडे पानी से धो लीजिए।
साइकोलॉजिकल समस्याएं:.

सोशल मीडिया साइकोलॉजिकल समस्याओं का एक सबसे बड़ा कारण है। यह छोटे बच्चों से लेकर वृद्ध लोगों को आकर्षित करता है और उन्हें मानसिक रूप से पीड़ित बनाता है। सोशल मीडिया के कारण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आई है। ऐसे कई अध्ययन हैं जो बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट के लिए सोशल मीडिया सीधे तौर पर कैसे जिम्मेदार है; उसकी वजह से कई लोगों को एंजाइटी और डिप्रेशन हो रहा है। सोशल मीडिया ने भी लोगों को अलग-थलग और अंतर्मुखी बना दिया है।

Tip: डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं और दिन में कम से कम 30 मिनट आस-पास कोई गैजेट न रखते हुए प्रकृति के समीप समय बिताना शुरू करें।
नींद से जुड़े डिसऑर्डरः

प्रकाश देने वाले (लाइट एमिटिंग) उपकरणों से नीली रोशनी निकलती है, जो प्राकृतिक प्रकाश के समान ही होती है। इससे आपका शरीर भ्रमित होता है और आपके सर्कैडियन रिदम या स्लीप साइकल को नुकसान पहुंचता है। लगातार फोन पर रहने या सोने से पहले कुछ देखने या सफेद रोशनी होने से भी आपकी नींद में खलल पड़ सकता है। इससे सिर्फ नींद में खलल नहीं पड़ता, बल्कि आप जागने के बाद भी थकान महसूस करते हैं। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया तो आप अनिद्रा के शिकार भी हो सकते हैं।

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