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अगर आप ‘लिव इन रिलेशनशिप’ में है, तो जान ले ये बातें

अगर आप ‘लिव इन रिलेशनशिप’ में है, तो जान ले ये बातें

भारत जैसे देश मे आज भी एक अविवाहित प्रेमी जोड़े के लिए सब कुछ सामान्य नही है,उनको हर जगह नोटिस किया जाता है,क्लास रूम से ले कर बस स्टॉप तक उनको नज़रे ढूंढ़ते रहती है,पब्लिक प्लेस मे तो परेशानी उठानी ही पड़ती है साथ साथ होटल के कमरों तक उनके लिए सब कुछ आसान नही होता है,भारत के कई विकसित शहरों मे भी एक अविवाहित जोड़े को कमरे लेने मे कई पापड़ बेलने पड़ते हैं,होटल अथारिटी सामज़िक और प्रशासनिक दवाब के वजह से कमरे उपलब्ध करवाने मे संकोच करती है। उनको डर रहता है कि वो कहीं अपने ग्राहक वर्ग का एक बड़ा हिस्सा ना खो दे,पुलिस प्रशासन का भी दवाब होता है,इस तरह की गतिविधि रोकने के लिए वो भी बाध्य कर दिए जाते हैं।

पर क्या कहता है नियम?

व्यस्कता कानून के तहत एक वयस्क जोड़ी अपने – अपने मूल पहचान पत्र दिखा कर एक साथ अपने शहर या किसी भी शहर के किसी भी होटल मे साइन-इन कर सकते हैं,वे होटल पर निर्भर करता है कि वो ऐसी व्यवस्था रखते हैं की नही पर नियम के तहत एक बार पहचान पत्र लेने के बाद होटल कमरा देने के लिए बाध्य हो जाता है । पहचान पत्र देखने के बाद वो जोड़े को मना नही कर सकता है । एक आंकड़े के तहत 60% जोड़ा अपने शहर के होटलों को ही महत्तव देते हैं,जो उनके लिए सुरक्षित और किफायती भी होती है ।
पुलिस रेड के बाद..

अगर आप किसी होटल मे, अपने वयस्क साथी के साथ ठहरे हुए हैं और अचानक पुलिस छापा मार देती है । तब घबराए नही,क्यों की अक्सर किसी इनपुट के आधार पर पुलिस छापा मारती है,उसके पास मजबूत आधार बिंदु होती है,बिना किसी आधार के पुलिस छापा नही मार सकती है,ये अधिकार उन्हें प्राप्त होती है ।

अगर पुलिस आप के कमरे पर नौक करती है और आप दरवाजा खोलते हैं तब आप पुलिस बेझिजक उसका पहचान पत्र मांग सकते हैं और वजह पूछ सकते हैं । साथ ही साथ अगर महिला पुलिस नही हो तो आप उनसे बात करने के लिए मना भी कर सकते हैं,इस तरह के कारवाई के लिए किसी भी प्रकार का कोई सेट रूल्स रुल बुक मे नही है फिर भी पुलिस किसी प्रकार से आप पर दबाव बनाती है और विशेष पेरशान करती है तो आप अपने परिजन से बात करवा सकते हैं,पहचान पत्र भी दिखा सकते हैं और साथ ही साथ अपना रिश्ता भी बता सकते हैं । बिना घबराएं और फिक्र किए आप बच सकते हैं ।
एक्सपर्ट की राय

एक्सपर्ट वकीलों की माने तो इस तरह की कार्रवाई के लिए किसी प्रकार का कोई सेट रूल्स नही अपनाया गया है पर दिल्ली उच्चतम न्यायालय के मई 2018 मे आए एक ऐतिहासिक निर्णय के आलोक मे एक वयस्क जोड़ा शादी के बिना भी एकसाथ रहने का अधिकार रखता है। शीर्ष अदालत ने केरल की 20 वर्षीय एक महिला से संबंधित मामले मे कहा था कि वह जिसके साथ चाहे रह सकती है।उक्त महिला की शादी टूट चुकी थी तब न्यायालय ने ये व्यवस्था देते हुए था कि ” ‘ लिव इन ’ संबंधों को अब विधायिका ने भी मान्यता दे दी है और इन संबंधों को महिला घरेलू हिंसा रोकथाम कानून 2005 के प्रावधानों के तहत जगह मिली है ” पर साथ ही साथ ये भी कहा था कि सार्वजनिक जगहों पर किसी प्रकार का अश्लीलता फैलाना कानूनी और सामाजिक बुराई मानी जाएगी और उचित कार्रवाई भी की जायेगी.. ।

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