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गोगामेड़ी कैसे जाएं, कहां रूकें और क्या देखे​​​​​​​

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गोगामेड़ी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है। जहां पर बाबा जाहरवीर और गुरू गोरखनाथ जी के प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर हर साल सावन और भादो के माह में लाखों श्रद्धालु पहुंचते है। गोगामेड़ी पहले गांव था अब एक छोटे शहर का रूप ले रहा है। गोगामेड़ी के आसपास रेत की परत पसरी है। रेत के बीच दोनों मंदिर स्थित है। यहां पर राजस्थान का जहाज कहे जाने वाला ऊँट देखने को मिल जायेगा।

सभी धर्मों के लोग पहुंचते है
गोगामेड़ी मेले में लोक देवता जाहरवीर महाराज जी के दर्शन करने के लिये राजस्थान सहित देश भर के विभिन्न राज्यों से हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी धर्मों के लाखों की तादाद में श्रद्धालु यहां आते है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मनोकामना मांगते है उसकी पूरी हो जाती है।

गोगामेड़ी और गोरख-टिल्ला दर्शनीय स्थान है

गोगा जी का जन्म स्थान ददरेवा में बनी मेड़ी को शीश मेड़ी कहा जाता है। ददरेवा मेड़ी में गोगाजी की घोड़े पर सवार मूर्ति स्थापित है। ददरेवा की मेड़ी बाहर से देखने पर किसी राजमहल से कम नहीं है। गोगा जी की समाधि-स्थल धुरमेड़ी कहलाता है। यह गोगामेड़ी स्थान भादरा से 15 किमी उत्तर में हनुमानग़ढ़ जिले में है। यहां पर गोगा जी का मंदिर और गोरख-टिल्ला व गोरखा तालाब दर्शनीय स्थान है। गोरखमठ में माता कालिका व हनुमान जी की मुर्तियां है। माना जाता है ददरेवा के साथ ही गोगामेड़ी आने पर ही यात्रा सफल मानी जाती है।

कैसे जाएं, कहां रूकें
गोगामेड़ी को जाने के लिये रेलमार्ग और सड़क मार्ग दोनों से जा सकते है। सराय रोहल्ला दिल्ली स्टेशन से कई एक्सप्रेस सादुलपुर होती हुई जाती है। नई दिल्ली से एक्सप्रेस गोगामेड़ी को सीधे जाती हैै। मेले के समय पर कई स्पेशल एक्सप्रेस और पैसेजर गाड़ी चलाई जाती है। इसके साथ रोडवेज दिल्ली, रेवाड़ी सहित अन्य शहरों से गोगामेड़ी को जाती है। ददरेवा में रूकने के स्थान कम है जबकि गोगामेड़ी में कई होटल खुल गये है। जहां जाकर रूक सकते है।

क्या खाये
गोगामेड़ी पर कोई विशेष व्यजन तो नहीं है लेकिन चावल बहुत कम मिलता है। दाल रोटी हर होटल और ढाबों पर मिल जाती है। पानी की समस्या है। बोतल के पानी ही मिलता है।

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